‘सशक्त’ ऐप से चोरी के वाहनों पर शिकंजा, IG राम गोपाल गर्ग ने दिए शत-प्रतिशत रिकवरी और डेटा अपडेट के निर्देश

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बिलासपुर (Social Activity BSP)। बिलासपुर रेंज में चोरी के वाहनों की बरामदगी और संदिग्ध वाहनों की त्वरित पहचान को लेकर पुलिस ने तकनीकी निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत करने की तैयारी की है। पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को ‘सशक्त’ ऐप की रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक लेते हुए अधिकारियों को चोरी के वाहनों की शत-प्रतिशत रिकवरी, लंबित डेटा को अपडेट करने और एफआईआर दर्ज होते ही वाहन संबंधी जानकारी ऐप पर दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए।

बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें रेंज के जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, एएसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी तथा हाल ही में पदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षक शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘सशक्त’ ऐप के माध्यम से दोपहिया और चारपहिया वाहनों की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना, संदिग्ध वाहनों की पहचान एवं ट्रैकिंग को तेज करना और रिकवरी दर बढ़ाना रहा।

एक सप्ताह में बैकलॉग पूरा करने के निर्देश

आईजी ने वाहन चोरी के मामलों में अधूरे डेटा और लंबित प्रविष्टियों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। जिन प्रकरणों में इंजन नंबर या चेसिस नंबर दर्ज नहीं हैं, उन्हें वाहन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित समय में अपडेट करने के लिए नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया गया।

उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होते ही चोरी हुए वाहन की जानकारी तत्काल ‘सशक्त’ ऐप में दर्ज की जाए। भविष्य में यथासंभव प्रत्येक एफआईआर में वाहन का इंजन नंबर और चेसिस नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज करने पर भी जोर दिया गया।

रेलवे स्टेशन से पार्किंग तक होगी चेकिंग

बैठक में पुलिस को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्र और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर ‘सशक्त’ ऐप के जरिए संदिग्ध वाहनों की चेकिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

पार्किंग स्थलों पर काम करने वाले ठेकेदारों और कर्मचारियों को भी ऐप पर यूजर बनाकर वाहन जांच अभियान से जोड़ने की योजना पर जोर दिया गया, ताकि सार्वजनिक पार्किंग में खड़े वाहनों की भी प्रभावी निगरानी हो सके।

नए पुलिस अधिकारियों को प्रतिदिन 20 वाहनों की जांच का लक्ष्य

रेंज में हाल ही में पदस्थ किए गए डीएसपी, निरीक्षक, उप निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों का ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नए यूजर्स को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

वहीं, बरामद या रिकवर किए गए वाहनों का डेटा तत्काल बैकएंड में अपडेट करने के निर्देश दिए गए, ताकि वाहन सुपुर्दगी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और रिकॉर्ड में किसी तरह का दोहराव न हो।

साइबर फ्रॉड में पैसा वापस कराने के लिए MRM का लाइव डेमो

बैठक में मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने साइबर फ्रॉड पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) का लाइव प्रेजेंटेशन दिया।

उन्होंने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित पोर्टल के माध्यम से शिकायत मिलते ही पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बैंक खातों में मौजूद राशि को होल्ड/फ्रीज कराने का प्रयास करती है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर होल्ड की गई राशि पीड़ित के मूल बैंक खाते में वापस कराने की कार्रवाई की जाती है।

साइबर फ्रॉड में ‘गोल्डन आवर’ सबसे अहम

एसपी भोजराम पटेल ने साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती 1 से 2 घंटे को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ित जितनी जल्दी साइबर फ्रॉड की सूचना 1930 पर देगा, उतनी जल्दी रकम को संबंधित खाते में ब्लॉक कराने की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी।

IG ने कहा—तकनीक आधारित पुलिसिंग से जनता को मिले सीधा लाभ

आईजी राम गोपाल गर्ग ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, तेज और परिणाममूलक बनाना है। उन्होंने ‘सशक्त’ ऐप को चोरी के वाहनों की पहचान और बरामदगी के साथ-साथ अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण बताया।

उन्होंने सभी अधिकारियों को ऐप का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, लंबित प्रकरणों एवं डेटा को अपडेट करने तथा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी, ताकि वाहन चोरी के मामलों में पेंडेंसी कम हो और आम जनता को पुलिस कार्रवाई का सीधा लाभ मिल सके।



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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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