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बिलासपुर। नूरानी मस्जिद के सबके पुराने पेशीमाम अल्हाज हाजी मोहम्मद रोज़े खां को आज दिनांक 3 जनवरी 2026 को नमाज़े ज़ोहर के बाद अदा की गई नमाज़े जनाज़ा के पश्चात खामोशगंज क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। नमाज़े जनाज़ा अंसारी चिकन सेंटर के पास, तय्यबा चौक, तलापारा में अदा की गई, जिसमें बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत कर मरहूम को आख़िरी विदाई दी।
क़ाबिले-ज़िक्र है कि मरहूम अल्हाज हाजी मोहम्मद रोज़े खां, जिनकी उम्र 102 बरस थी, का इंतेकाल 2 जनवरी 2026 को हो गया था। वे हाजी अब्दुल शहादत खान, मरहुम हाजी अब्दुल मजिद खान, हाजी अब्दुल सुलेमान खान, अब्दुल कादिर खान, अब्दुल शाकिर खान एवं अब्दुल नाजिर खान के वालिद थे।
मरहूम ने तक़रीबन 19 साल तक नूरानी मस्जिद में पेशीमाम के तौर पर इमामत की। इस दौरान उन्होंने दीनी ख़िदमात, नमाज़ की इमामत, तालीम-ओ-तर्बियत और समाजी इस्लाह में अहम किरदार अदा किया। उनकी ज़िंदगी सादगी, सब्र और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की बेहतरीन मिसाल रही।
अपने तवील दीनी सफ़र के दौरान उन्होंने कई नस्लों की रहनुमाई की। मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि मरहूम हमेशा अमन, इंसानियत और इत्तेहाद का पैग़ाम दिया करते थे। उनके शफ़ीक़ मिज़ाज और नरम लहजे की वजह से हर तबक़े में उन्हें बेहद इज़्ज़त की निगाह से देखा जाता था।
मरहूम के विसाल से दीनी और समाजी हल्क़ों में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। नमाज़े जनाज़ा और तदफ़ीन के मौके पर मौजूद लोगों ने मरहूम की मग़फ़िरत और बुलंद दर्जात के लिए दुआ की।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौज़ा-ए-जन्नत बनाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद






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