Social Activity BSP
बिलासपुर (Social Activity BSP)। 15 मई 2026 को शहर स्थित रमजानिया बाबा दरगाह में राहे हिदायत की जानिब से एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में बिलासपुर शहर के बड़े-बड़े आलिम-ओ-उलेमा, मस्जिद कमेटियों के सदस्य, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, संस्थापक सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य उर्स, शादी-पार्टी और अन्य कार्यक्रमों में डीजे, धुमाल एवं नाच-गाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने को लेकर विचार-विमर्श करना था।
बैठक में मौजूद लोगों ने अपने-अपने मशवरे देते हुए कहा कि इस्लाम में इस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति नहीं है, इसलिए धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में ऐसी चीजों से बचना चाहिए और समाज स्तर पर इसे रोकने के लिए पहल की जानी चाहिए।
मुस्लिम समुदाय ने उर्स में हुई खुराफात की कड़ी निंदा की बिलासपुर - मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उर्स के दौरान हुई गैर-शरई हरकतों और खुराफात की सख़्त निंदा की है। समुदाय ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी खुराफात को रोकने के लिए शहर के तमाम उलमा-ए-किराम और मस्जिद कमेटियां इस पर ठोस कार्रवाई करें और कड़े फैसले लें।राह-ए-हिदायत तंज़ीम ने आश्वासन दिया है कि इस मामले को लेकर जल्द ही उलमा-ए-किराम और मस्जिद कमेटियों के साथ बैठक करके एक नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी। इसके साथ ही उर्स कमेटी के साथ बैठकर भी हुई खुराफात को ख़त्म करने के लिए इस पर गंभीरता से काम किया जाएगा, ताकि उर्स की पाकीज़गी बरक़रार रहे और शरीअत के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की खुराफात न हो।
बैठक के दौरान विशेष रूप से हजरत मदारशाह रह. बाबा के उर्स में हुए कथित अशोभनीय नाच-गाने और “नंगे ढंग” से प्रस्तुत कार्यक्रमों पर चिंता जताई गई। उपस्थित लोगों ने इसे मुस्लिम कौम के लिए शर्मसार करने वाली बात बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक परंपराओं और समाज की छवि को प्रभावित करती हैं।
बैठक में यह बात भी रखी गई कि प्रशासन द्वारा डीजे और अत्यधिक ध्वनि (ओवर नॉइज़) को लेकर नियम एवं रोक होने के बावजूद कुछ लोग नाच-गाने को महत्व देते हुए डीजे, धुमाल और तेज आवाज वाले कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न होती हैं। उपस्थित लोगों ने प्रशासन से भी नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।
बैठक में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि यह पहल केवल मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि हर जाति, हर धर्म और हर समुदाय के लोगों के हित में है। उनका कहना था कि तेज आवाज वाले डीजे और धुमाल से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के कारण आम लोगों, बुजुर्गों और हृदय, बीपी व शुगर जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को काफी तकलीफ होती है। ऐसे में इस प्रकार की गतिविधियों पर नियंत्रण होने से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिलेगा।
बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने एकजुट होकर ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने, समाज में जागरूकता बढ़ाने और धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को मर्यादित तरीके से आयोजित करने की बात कही। साथ ही इस मुद्दे पर सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया गया।
(नोट: यह समाचार बैठक में व्यक्त विचारों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।)
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद







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