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समागम की जानकारी
राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित विश्वप्रसिद्ध सूफी तीर्थस्थल, अजमेर दरगाह शरीफ, जहाँ हर वर्ष, सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (र.अ.) की बरसी के अवसर पर उर्स-मुलाबरक का आयोजन होता है। इस वर्ष इस आयोजन का 814वाँ उर्स-मुलाबरक मनाया जा रहा है।
मुख्य तिथियाँ-उपक्रम
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झंडा-होस्टिंग समारोह (Flag Ceremony) — 17 दिसंबर 2025 से।
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उर्स-मुलाबरक की शुरुआत — 22 दिसंबर 2025 से।
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जन्नती दरवाज़ा खोलने की तिथि — 27 दिसंबर 2025।
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छठी शरीफ (उर्स का पुण्यदिन) — 27 दिसंबर 2025।
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उर्स-समापन (बड़ा कुल) — 30 दिसंबर 2025।
आयोजन के विशेष पहलू
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इस अवसर पर दुनियाभर से श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, सूफी संगीत (क़व्वाली), रात-भर जिक्र-महफ़िल, चादरपोशी, फूल चढ़ाना, लंगर-भोजन जैसी परम्पराएँ होती हैं।
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आयोजन जहाँ भक्ति का पर्व है, वहीं यह सेवा-भाव और सहजता व मेलजोड़ का भी प्रतीक है — सामाजिक बंधुत्व का संदेश ले कर आता है।
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व्यवस्थाओं के दृष्टिकोण से अग्रिम तैयारियाँ की जा रही हैं — ज़रूरी है कि भक्तगण समयपूर्व टिकिट, आवास-व्यवस्था व यात्रा तय करें क्योंकि भीड़ अधिक रहती है।
श्रद्धालुओं के लिए सुझाव
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यदि आप इस वर्ष उर्स में शामिल होना चाहें, तोAccommodation और यात्रा-व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करें क्योंकि इन दिनों शहर में प्रवास कठिन हो सकता है।
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चादर-फूल-मन्नत की तैयारी पहले से करें।
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मौसम और स्थानीय भीड़-भाड़ को देखते हुए समय का प्रबंधन रखें।
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कार्यक्रमों की बदलती तिथियों के लिए दरगाह की आधिकारिक सूचना-सूची देखें।
सामाजिक व आध्यात्मिक महत्व
यह पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह सामान्य जीवन से ऊपर उठकर मानवता, सहिष्णुता और प्रेम-भक्ति का सन्देश देता है। जहाँ जात-धर्म की सीमाएँ घट जाती हैं और श्रद्धा-भाव द्वारा सब जुड़ जाते हैं।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद
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