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Bilaspur | Social Activity BSP Desk
AIIMS रायपुर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, 100 से अधिक चिकित्सक और शोधार्थी बने सहभागी
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) बिलासपुर में शनिवार को “गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (Good Clinical Practice – GCP)” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े पेशेवरों, डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को नैतिक और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप क्लिनिकल रिसर्च के संचालन का प्रशिक्षण देना था।
🎓 उद्घाटन सत्र — नैतिक अनुसंधान ही सच्चे विज्ञान की नींव
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने दीप प्रज्वलित कर किया।
अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा —
“गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस का पालन न केवल शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है, बल्कि प्रतिभागियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है। नैतिक अनुसंधान ही सच्चे वैज्ञानिक विकास की नींव है।”
🧠 विशेषज्ञों ने साझा किए विचार — एथिक्स से लेकर डेटा इंटीग्रिटी तक चर्चा
कार्यशाला में AIIMS रायपुर से आमंत्रित विशेषज्ञों ने विभिन्न पहलुओं पर गहन विमर्श किया।
इनमें शामिल रहे —
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डॉ. नितिन गायकवाड़
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डॉ. योगेन्द्र के.
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डॉ. पुग़ाडैनथन
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डॉ. संजीव कांत
इन विशेषज्ञों ने क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया, नियामक आवश्यकताएं, नैतिक समीक्षा (Ethical Review), दस्तावेजीकरण (Documentation), प्रतिभागियों की सहमति (Informed Consent) और डेटा अखंडता (Data Integrity) जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
इसके साथ ही भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना पर भी चर्चा की गई।
👩⚕️ 100 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इस एक दिवसीय कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, रिसर्च कोऑर्डिनेटर और मेडिकल PG विद्यार्थी शामिल थे।
सत्र के अंत में आयोजित इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने अपने सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे और व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
🎤 समापन सत्र — धन्यवाद ज्ञापन और भविष्य की योजना
कार्यशाला का समापन डॉ. मोनिका साहू के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा कहा —
“इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल ज्ञानवृद्धि करते हैं, बल्कि शोध की नैतिकता और गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करते हैं।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि सिम्स भविष्य में ऐसे रिसर्च-केंद्रित प्रशिक्षण सत्रों का नियमित आयोजन करेगा।
🧩 आयोजन का दायित्व और विभागीय सहयोग
कार्यशाला का आयोजन फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. श्रेया तोड़ी के मार्गदर्शन में किया गया।
इस आयोजन में सिम्स के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सकों की सक्रिय उपस्थिति रही —
डॉ. बी.पी. सिंह (चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल),
डॉ. मधुमिता मूर्ति (HOD, एनेस्थीसिया),
डॉ. अर्चना सिंह (HOD, रेडियोलॉजी),
डॉ. संगीता रमन जोगी (HOD, प्रसूति एवं स्त्री रोग)
और डॉ. हेमलता ठाकुर (HOD, सामुदायिक चिकित्सा विभाग) सहित अनेक फैकल्टी सदस्यों की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ी।
📘 क्या है GCP — गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस?
गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित मानक है, जो यह सुनिश्चित करता है कि —
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प्रत्येक क्लिनिकल ट्रायल वैज्ञानिक रूप से सटीक और नैतिक रूप से सही हो।
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प्रतिभागियों की सुरक्षा, गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा की जाए।
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डेटा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।
🎯 PG विद्यार्थियों के लिए क्यों जरूरी है GCP प्रशिक्षण
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया —
“अब GCP प्रशिक्षण पोस्टग्रेजुएट (PG) परीक्षा की पात्रता के लिए अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले चिकित्सक और शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्लिनिकल रिसर्च करने में सक्षम हों।”
🧾 कार्यशाला का सार
यह आयोजन सिम्स बिलासपुर की उस पहल का हिस्सा है जिसके तहत संस्थान को राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल रिसर्च सेंटर के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यशाला ने प्रतिभागियों में नैतिक अनुसंधान की समझ, डेटा हैंडलिंग की सावधानियां, और वैज्ञानिक विश्वसनीयता के प्रति नई जागरूकता पैदा की।
📍 कार्यशाला की प्रमुख जानकारी
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स्थान: छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर
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तिथि: 8 नवंबर 2025
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विषय: गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP)
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आयोजक विभाग: फार्माकोलॉजी विभाग
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मुख्य अतिथि: डॉ. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता
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समन्वय: प्रो. डॉ. श्रेया तोड़ी
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प्रतिभागी: 100+ डॉक्टर, शोधकर्ता और PG विद्यार्थी
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद







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