Social Activity BSP
बिलासपुर, 28 फरवरी 2026 (Social Activity BSP)।
शहर के चर्चित हैवेंस पार्क होटल कांड में करीब ढाई वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह की अदालत ने मुख्य आरोपी रितेश निखारे उर्फ मैडी को 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने कुल 13 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (जान से मारने की कोशिश), 147 (बलवा) समेत अन्य धाराओं में दोषी ठहराया है। फैसले को शहर में संगठित अपराध और सार्वजनिक हिंसा के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
घटना 6 मई 2023 की रात की है। शहर के व्यस्त इलाके में स्थित होटल के सामने मामूली विवाद ने अचानक उग्र रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपियों ने समूह बनाकर पीड़ित पक्ष की घेराबंदी की और लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से हमला कर दिया।
हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और क्षेत्र में दहशत फैल गई।
अगले दिन 7 मई 2023 को पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। क्रमशः सभी 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 24 जुलाई 2023 को न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया।
करीब ढाई वर्ष तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की गहन पड़ताल के बाद 28 फरवरी 2026 को अदालत ने दोष सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई।
ये हैं मामले के दोषी
मुख्य आरोपी रितेश निखारे उर्फ मैडी के अलावा जिन आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उनमें शामिल हैं—
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सिद्धार्थ शर्मा
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छोटू शर्मा
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फरीद अहमद उर्फ सोनू खान
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आयुष मराठा उर्फ बाबू एम
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वरुण डिकेड शर्मा उर्फ प्रिंस शर्मा
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काव्य गढ़वाल
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रूपेश दुबे
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आदित्य प्रकाश दुबे
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सोनू माली उर्फ आशीष माली
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मोहम्मद साबिर उर्फ रानू
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विकास वैष्णव उर्फ बाबा राजू
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विराज सिंह ध्रुव
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गोलू विदेशी
अदालत ने सभी को अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी मानते हुए दंड निर्धारित किया।
सुनवाई में सामने आए अहम तथ्य
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हमला पूर्व नियोजित था और समूह में अंजाम दिया गया।
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आरोपियों की संख्या अधिक होने से पीड़ित पक्ष को गंभीर चोटें आईं।
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घटना सार्वजनिक स्थल पर हुई, जिससे आम लोगों में भय का माहौल बना।
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मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अभियोजन के पक्ष में मजबूत साबित हुए।
अदालत का सख्त संदेश
निर्णय सुनाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थल पर सामूहिक हिंसा और जानलेवा हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। कानून को हाथ में लेने वालों को कठोर दंड भुगतना ही पड़ेगा।
करीब तीन वर्षों से चर्चित इस प्रकरण में आए फैसले को शहर में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल करने वाला निर्णय माना जा रहा है।
कानून का राज सर्वोपरि
हैवेंस पार्क होटल कांड का फैसला यह संदेश देता है कि चाहे आरोपी कितने भी प्रभावशाली या संगठित क्यों न हों, न्यायिक प्रक्रिया अंततः अपना परिणाम देती है। संगठित हिंसा पर अदालत की सख्ती भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद


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