कैमरों से बौखलाए कलेक्टर! डोंगरगढ़ की नवरात्रि बैठक में मीडिया पर पाबंदी, पत्रकारों ने किया सामूहिक बहिष्कार

Social Activity BSP

डोंगरगढ़(Social Activity BSP)। धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ में चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों को लेकर आयोजित प्रशासनिक बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब बैठक के दौरान मीडियाकर्मियों को कवरेज करने से रोक दिया गया। कैमरे चालू होते ही कलेक्टर के हस्तक्षेप से माहौल गरमा गया और नाराज पत्रकारों ने बैठक का सामूहिक बहिष्कार करते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल गए।

दरअसल, विश्व प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी मंदिर में लगने वाले चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने ट्रस्ट समिति, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। यह बैठक सुबह 11 बजे निर्धारित थी, लेकिन बताया जा रहा है कि करीब तीन घंटे की देरी के बाद अधिकारी बैठक में पहुंचे।

बैठक में दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्यनारायण राठौर, राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव और पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कैमरे चलते ही शुरू हुआ विवाद
बैठक शुरू होते ही पत्रकारों ने सामान्य प्रक्रिया के तहत वीडियो रिकॉर्डिंग और कवरेज शुरू किया। आरोप है कि इसी दौरान कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडियाकर्मियों को वीडियो बनाने से रोक दिया। प्रशासन के इस रवैये को पत्रकारों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया।

स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पत्रकारों ने इसे अपमानजनक बताते हुए बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया और मीटिंग हॉल से बाहर निकल आए।

लाखों श्रद्धालुओं के मेले की तैयारी पर सवाल
डोंगरगढ़ में हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक विशाल धार्मिक मेला लगता है। यहां स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए देश-प्रदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

स्थानीय मीडिया लंबे समय से मेले की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन से सवाल उठाती रही है—चाहे वह यातायात अव्यवस्था हो, श्रद्धालुओं की सुरक्षा या बुनियादी सुविधाओं की कमी।

पारदर्शिता पर उठे सवाल
पत्रकारों का कहना है कि जब बैठक सार्वजनिक आयोजन से जुड़ी है और उसमें जनप्रतिनिधि भी मौजूद हैं, तो मीडिया कवरेज से रोकना समझ से परे है। उनका तर्क है कि ऐसे मामलों में मीडिया की मौजूदगी ही पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।

इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि प्रशासन इस मामले पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाता, तो आगे विरोध और तेज हो सकता है।

डोंगरगढ़ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियों के बीच पैदा हुआ यह विवाद अब प्रशासन और मीडिया के संबंधों पर भी नई बहस छेड़ रहा है।

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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद




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