Social Activity BSP
बिलासपुर (Social Activity BSP)। शहर के नयापारा स्थित कुष्ठ आश्रम के रहवासी आज अपनी पीड़ा लेकर कलेक्ट्रेट और खाद्य कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासन को आवेदन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। वर्षों से समाज के हाशिए पर जीवन गुजार रहे इन लोगों के सामने अब तकनीकी व्यवस्था भी बड़ी बाधा बन गई है।
बायोमेट्रिक सिस्टम बना सबसे बड़ी परेशानी
आश्रम के निवासियों ने बताया कि अधिकांश लोग कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनके हाथों की उंगलियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या पूरी तरह काम नहीं करतीं। ऐसे में फिंगरप्रिंट आधारित ई-केवाईसी और सत्यापन उनके लिए संभव नहीं है।
नतीजतन, वे कई जरूरी सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।
राशन, बैंकिंग और पेंशन तक प्रभावित
बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होने के कारण—
👉 राशन वितरण में दिक्कत
👉 बैंक से पैसा निकालने में परेशानी
👉 गैस कनेक्शन और अन्य सेवाएं बाधित
👉 पेंशन मिलने में रुकावट
इन समस्याओं ने पहले से ही संघर्ष कर रहे आश्रमवासियों की स्थिति और गंभीर बना दी है।
प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
आश्रम के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके लिए फिंगरप्रिंट के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, जैसे—
- आईरिस स्कैन
- ओटीपी आधारित सत्यापन
- मैनुअल पहचान प्रक्रिया
ताकि वे भी सरकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त कर सकें।
“बीमारी के साथ सुविधाओं के लिए भी संघर्ष”
आवेदन में हस्ताक्षर करने वाली कृष्णा देवी ने भावुक होकर कहा कि
“हम लोग पहले ही बीमारी से जूझ रहे हैं, अब सुविधाओं के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। हाथ नहीं होने के कारण मशीन हमें पहचान नहीं पाती, जिससे हम हर सुविधा से वंचित हो रहे हैं।”
प्रशासन से उम्मीद
आश्रम के रहवासियों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी इस गंभीर समस्या को समझते हुए जल्द ठोस समाधान निकालेगा, ताकि वे भी सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
निष्कर्ष
👉 यह मामला तकनीक और मानव संवेदनशीलता के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करता है।
👉 बड़ा सवाल यह है कि क्या तकनीक का लाभ सभी तक समान रूप से पहुंच रहा है, या कुछ लोग इससे पीछे छूटते जा रहे हैं?
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद



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