बिलासपुर में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित परिवार ने भूमाफियाओं के खिलाफ खोला मोर्चा; अवैध कॉलोनी विकसित करने का दावा

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बिलासपुर (Social Activity BSP)। शहर के पेंडारी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लोखंडी में पुश्तैनी कृषि भूमि पर कथित कब्जा और अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने कुछ लोगों पर लगभग 100 वर्ष पुरानी पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा करने, सीमांकन पिलर तोड़ने तथा बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसाने का आरोप लगाया है। परिवार ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए अवैध निर्माण पर रोक लगाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित इरफानुर रहमान ने बताया कि संबंधित भूमि उनके दादा-परदादा के समय से परिवार के स्वामित्व और कब्जे में रही है। उनके अनुसार परिवार के कुछ सदस्यों ने अपने हिस्से की भूमि का विक्रय किया था, लेकिन अब शेष भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन की मौजूदगी में पूर्व में भूमि का सीमांकन कर पिलर लगाए गए थे और पंचनामा भी तैयार किया गया था, लेकिन बाद में उन पिलरों को तोड़कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।




परिवार का आरोप है कि कृषि भूमि पर बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति और स्वीकृत ले-आउट के प्लॉटिंग कर अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। मौके पर सड़क, प्रवेश द्वार (गेट) और मकानों का निर्माण भी कराया जा रहा है। पीड़ितों का दावा है कि प्रशासन द्वारा कई बार निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए जाने के बावजूद निर्माण और प्लॉटों की बिक्री लगातार जारी है।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि तुलसी सिंह राजपूत, हेमंत सिंह राजपूत, कन्हैया सिंह राजपूत, सुनील कश्यप, अंजू सिंह राजपूत और रवि सिंह सहित कुछ अन्य लोग पूरे मामले में शामिल हैं। उनका कहना है कि उन पर जमीन बेचने का दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न की जा रही है।

शिकायत के बाद राजस्व विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। परिवार के अनुसार पटवारी ने मौके पर पहुंचकर टूटे हुए सीमांकन पिलरों का निरीक्षण किया तथा नजरी नक्शा तैयार किया। अधिकारियों ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


जमीन मालिक आजम खान ने बताया कि उनकी भूमि खसरा नंबर 216/1 एवं 216/2 में दर्ज है। इसके अलावा परिवार की अन्य भूमि खसरा नंबर 216, 219, 222, 229 और 233 में स्थित है। उनका आरोप है कि बिना वैध ले-आउट, सीमांकन और सक्षम अनुमति के इन खसरों से जुड़े क्षेत्र में प्लॉट काटकर बिक्री की जा रही है, जिससे भविष्य में खरीदारों को भी कानूनी विवादों और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

परिवार ने यह भी बताया कि मामले को लेकर पूर्व में समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक सूचना जारी कर लोगों से अपील की गई थी कि संबंधित खसरा नंबरों की भूमि खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों, स्वामित्व और वैधानिक अनुमतियों की पूरी तरह जांच कर लें।


फिलहाल मामले की जांच राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर जारी है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाने, भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं, समाचार लिखे जाने तक आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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