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जानकारी के अनुसार छात्रा नैनी रजक ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत विद्यालय में 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन पत्र, आधार कार्ड सहित सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे। परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन ने प्रवेश देने के बजाय अलग-अलग कारण बताकर मामले को लगातार टाल दिया।
विद्यालय स्तर पर समाधान नहीं मिलने पर परिजनों ने 30 जून 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उल्लेख किया गया कि शासकीय विद्यालय होने के बावजूद छात्रा को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है तथा मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के रिकॉर्ड के अनुसार 5 जुलाई 2026 को शिकायत का निराकरण दर्ज कर दिया गया। हालांकि शिकायत की स्थिति में यह भी उल्लेख है कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि अथवा असंतुष्टि की पुष्टि अभी शेष है। परिजनों का कहना है कि शिकायत बंद दिखाए जाने के बावजूद छात्रा को अब तक प्रवेश नहीं मिला है। ऐसे में शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने बिना वास्तविक समाधान किए ही शिकायत का निराकरण दर्ज कर दिया। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी सरकारी स्कूल में छात्रा को न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान किस प्रकार होगा।
यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली के साथ-साथ शिकायत निवारण प्रणाली की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर छात्रा को शीघ्र प्रवेश दिलाता है या नहीं, तथा बिना समाधान के शिकायत का निराकरण दर्ज करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
(नोट: यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध शिकायत रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित विद्यालय एवं शिक्षा विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद
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