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बिलासपुर/रायपुर।
दिवाली की रात जब पूरा देश खुशियों की रौशनी में डूबा था, उसी समय छत्तीसगढ़ के सरकारी डॉक्टरों ने जीवन बचाने का एक चमत्कारिक उदाहरण पेश किया। बिलासपुर की 10 वर्षीय मासूम काव्या के सिर में खेलते समय एक घंटी का नुकीला हिस्सा उसकी बाईं आंख से होते हुए सीधे दिमाग तक जा धंसा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि पलभर की देरी भी उसकी जान ले सकती थी।
तत्काल एक्शन — सिम्स बिलासपुर से डीकेएस रायपुर तक की रेस
घायल बच्ची को तुरंत सिम्स मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर लाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर न्यूरोसर्जिकल सुविधा के लिए डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, रायपुर रेफर किया।
डीकेएस में पहुंचते ही न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. राजीव साहू और न्यूरोसर्जन डॉ. लवलेश राठौड़ ने हालात की गंभीरता समझते हुए तुरंत ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी।
चार घंटे चली जीवनदायिनी सर्जरी
डॉ. राजीव साहू ने बताया —
> “बच्ची की आंख के रास्ते घंटी का सिरा सीधे ब्रेन टिशू में चला गया था। खतरा बहुत बड़ा था — ब्रेन हैमरेज, मिर्गी या पैरालिसिस तक की आशंका थी। हमने एंडोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया ताकि दिमाग के ऊत्तकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।”
करीब चार घंटे चली सर्जरी में डॉ. लवलेश राठौड़, डॉ. नमन चंद्राकर, डॉ. देवश्री और नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रांजल मिश्रा की टीम शामिल रही।
ऑपरेशन के दौरान दिमाग और आंख के बीच फंसी 11 सेंटीमीटर लंबी घंटी को बेहद सावधानी से निकाला गया। सर्जरी के बाद जब काव्या ने दोनों आंखों से साफ देखा और मुस्कुराई, तो ऑपरेशन थिएटर में खुशी की लहर दौड़ गई।
“यह किसी चमत्कार से कम नहीं” — डॉ. लवलेश राठौड़
> “तकनीकी रूप से यह सर्जरी बेहद कठिन थी। बच्ची की आंख और दिमाग दोनों को सुरक्षित रखना हमारे लिए चुनौती थी। टीमवर्क और धैर्य से हमने यह संभव किया — सचमुच यह एक चमत्कारिक केस था।”
सफल समन्वय — सिम्स बिलासपुर और डीकेएस रायपुर की संयुक्त जीत
इस सफलता में सिम्स बिलासपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शिप्रा, उप अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा और उनकी टीम का भी बड़ा योगदान रहा। उनकी तत्परता और त्वरित रेफरल से ही मरीज की जान बचाई जा सकी।
यह उदाहरण दिखाता है कि अब राज्य के सरकारी अस्पतालों के बीच समन्वय और संसाधन-साझेदारी से “इमरजेंसी केयर सिस्टम” मजबूत हो चुका है।
सरकारी अस्पतालों में अब “वर्ल्ड-क्लास” इलाज
डीकेएस रायपुर और सिम्स बिलासपुर जैसे संस्थान अब आधुनिक उपकरणों, कुशल डॉक्टरों और अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित हैं।
राज्य सरकार की पहल से सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और डॉक्टरों की नियुक्तियों में तेजी आई है — जिसके चलते छत्तीसगढ़ आज चिकित्सा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो रहा है।
अब तो विदेशों से भी मरीज इलाज के लिए रायपुर पहुंच रहे हैं।
“सरकारी डॉक्टरों ने हमारी बच्ची को जिंदगी दी” — परिजनों की भावनात्मक प्रतिक्रिया
काव्या के परिजनों ने कहा
> “हमें लगा अब कुछ नहीं बचा सकता, लेकिन डॉक्टरों ने हमारी बच्ची को दोबारा जिंदगी दी। सरकारी अस्पताल में ऐसा इलाज मिलना किसी वरदान से कम नहीं है।”
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की एंडोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी देश के चुनिंदा सेंटर्स में ही होती है। डीकेएस रायपुर में हुआ यह सफल ऑपरेशन साबित करता है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी डॉक्टर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सेवाएं देने में सक्षम हैं।
मुख्य बिंदु :
बिलासपुर की 10 वर्षीय बच्ची की आंख से दिमाग तक धंसी घंटी
रायपुर डीकेएस में 4 घंटे चली जटिल सर्जरी
दोनों आंखें और जान — दोनों सुरक्षित
सर्जरी का नेतृत्व डॉ. राजीव साहू और डॉ. लवलेश राठौड़ ने किया
सिम्स बिलासपुर और डीकेएस टीम के समन्वय से मिली सफलता
सरकारी अस्पतालों में अब वर्ल्ड-क्लास इलाज संभव
यह केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि सरकारी चिकित्सा प्रणाली की सफलता की कहानी है — जो बताती है कि जब विशेषज्ञता, इच्छाशक्ति और सेवा-भाव साथ हों, तो सरकारी अस्पताल भी “जीवन बचाने के चमत्कार” कर सकते हैं।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद




