पति ने कराया गर्भपात, साथ भी नहीं रखता... बस्तर के तहसीलदार पर पत्नी के गंभीर आरोप – “50 लाख देने के बाद भी मांगता रहा और दर्द देता रहा

 

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अंबिकापुर, 30 अक्टूबर।
सरगुज़ा की एक महिला ने अपने ही पति — जो वर्तमान में बस्तर जिले में तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं — पर दहेज मांगने, उत्पीड़न करने और जबरन गर्भपात कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़िता ने अब न्याय की गुहार सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचकर लगाई है।


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💔 “शादी विधि-विधान से हुई थी, मगर रिश्ता ज़हर बन गया…”

पीड़िता रेणु गुप्ता, सरगुज़ा निवासी, का कहना है कि उसकी शादी वर्ष 2022 में राहुल गुप्ता से विधि-विधानपूर्वक हुई थी।
राहुल गुप्ता इस समय बस्तर में तहसीलदार हैं।
रेणु का आरोप है कि शादी के बाद ससुरालवालों ने दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी।

शादी के वक्त 50 लाख रुपये दहेज के रूप में दिए गए थे,

लेकिन उसके बाद भी मेरे ससुरालवाले 25 लाख और मांगने लगे।

जब मैं नहीं दे पाई, तो उन्होंने मुझे अपने साथ रखना बंद कर दिया।



— रेणु गुप्ता का आरोप

⚠️ गर्भपात का आरोप — “मेरे शरीर से भी छीन लिया मेरा बच्चा”

रेणु का सबसे गंभीर आरोप अपने पति राहुल गुप्ता पर है —

उसका कहना है कि दहेज विवाद के बीच उसका गर्भपात भी जबरन करा दिया गया, और तब से पति ने उसके साथ रहना तक छोड़ दिया।

यह घटना अब न सिर्फ एक वैवाहिक विवाद, बल्कि महिला अधिकारों और न्याय व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन चुकी है।



🚔 थाने से लेकर सीएम तक — इंसाफ की तलाश में महिला

पीड़िता ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके तहत 29 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी।

लेकिन — आरोपी तहसीलदार राहुल गुप्ता थाने नहीं पहुंचे।

कार्रवाई न होते देख महिला पहले एसपी ऑफिस पहुंची, और जब वहां भी बात नहीं बनी तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने जा पहुंची।

पुलिस कर्मियों ने उसे रोककर मामले में फिर से नोटिस जारी करने और ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया।




⚖️ अब क्या होगा आगे?

पुलीस ने महिला की शिकायत को गंभीर मानते हुए पुनः जांच शुरू की है।

आरोपी तहसीलदार को एक और नोटिस जारी किया गया है

महिला आयोग और प्रशासन को भी रिपोर्ट सौंपी जा रही है ताकि मामले में पारदर्शिता बनी रहे।


🗣️ जनता में गुस्सा, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज़

सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो गया है।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि “अगर एक अधिकारी की पत्नी को इंसाफ पाने के लिए सीएम के पास जाना पड़े, तो आम महिला का क्या होगा?”

कई यूज़र्स ने राज्य सरकार से तुरंत सस्पेंशन और निष्पक्ष जांच की मांग की है।



🧩 निष्कर्ष

रेणु गुप्ता का केस सिर्फ एक वैवाहिक विवाद नहीं, बल्कि उस समाज की परछाई है जहाँ दहेज और ताकत के बीच इंसानियत अक्सर कुचल जाती है।

अब सबकी निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर हैं —

क्या तहसीलदार राहुल गुप्ता के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा या यह मामला भी फाइलों के ढेर में गुम हो जाएगा?


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद






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