चंडीगढ़ में पालतू जानवरों पर नए बाय-लॉज़: 7 कुत्ते नस्लें बैन, सुरक्षा और समुदाय नियंत्रण की पहल

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चंडीगढ़ की स्थानीय सरकार, Municipal Corporation Chandigarh (MC) ने पालतू और सामुदायिक कुत्तों से जुड़े व्यवहार एवं सार्वजनिक-सुरक्षा विषयों में सुधार लाने के लिए नए “Municipal Corporation Chandigarh Pet & Community Dogs Bye‑Laws, 2023” और उसके बाद फाइनल वर्शन “Bye-Laws 2025” पेश किए हैं। 
ये नियम लंबे समय से विचाराधीन थे; पिछले 2 वर्ष से चर्चा और मसौदे चल रहे थे।
उद्देश्य:

  • पालतू कुत्तों के मालिक-दायित्व (owner responsibility) को स्पष्ट करना

  • समाज में पालतू एवं सामुदायिक (सड़क-पर रहने वाले) कुत्तों का बेहतर समन्वय करना

  • सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों से उत्पन्न होने वाले सुरक्षा/स्वच्छता संबंधी मुद्दों को नियंत्रित करना


2. मुख्य प्रावधान

🐶 नस्ल-प्रतिबंध

  • नए नियमों में छह-सात “खतरे में मानी जाने वाली” कुत्ता नस्लों (और उनके क्रॉसब्रीड्स) को प्रतिबंधित किया गया है। 

  • इन नस्लों में शामिल हैं: American Bulldog, American Pitbull Terrier (Pitbull), Bull Terrier, Cane Corso, Dogo Argentino, Rottweiler. 

  • वर्तमान में इन नस्लों को नए पंजीकरण के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी; लेकिन पहले से पंजीकृत मालिकों को कुछ छूट दी गई है। 

📋 पंजीकरण और शुल्क

  • प्रत्येक पालतू कुत्ते को पंजीकृत करना अनिवार्य किया गया है।

  • पंजीकरण शुल्क लगभग ₹ 500 प्रति कुत्ता निर्धारित है। 

  • इसके बाद हर पाँच साल में नवीनीकरण शुल्क कम (लगभग ₹ 50) तय किया गया है। 

🏠 संख्या-सीमाएँ (Dogs per household)

  • घर के आकार (मोजा/मूल प्लॉट) के आधार पर पालतू कुत्तों की संख्या पर प्रतिबंध है। 

    • ≤ 5 मॉला वाले घरों में: 1 कुत्ता (हालाँकि एक-से ज़्यादा परिवार होने पर अधिक हो सकता है)

    • 5 मॉला ≤ 12 मॉला: 2 कुत्ते, लेकिन यदि एक से अधिक परिवार हों तो तीन तक हो सकते हैं

    • 12 मॉला ≤ 1 कनाल: 3 कुत्ते जिन्हें कम-से-कम एक को अपनाया हुआ मिक्स/इंडी (mongrel/indie) होना चाहिए

    • 1 कनाल: 4 कुत्ते (दो इनमें मिक्स/इंडी होने की शर्त के साथ)

  • यदि एक परिवार के पास दो से अधिक कुत्ते हों, तो अतिरिक्त कुत्ते मिक्स/इंडी नस्ल के होने चाहिए। 

🚫 सार्वजनिक जगहों में प्रतिबंध

  • कुछ प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पालतू कुत्तों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है — जैसे Sukhna Lake, Rock Garden, Rose Garden, Leisure Valley आदि। 

  • लेश व मज़ुल (मसल) के नियम लागू होंगे — पेट कुत्ते को जब सार्वजनिक जगह ले जाया जाए तो लाश (leash) पर होना अनिवार्य, खतरनाक नस्लों के लिए मज़ुल व “सहयोगी को छड़ी” रखना जरूरी।

🧾 स्वछता, जिम्मेदारी और दायित्व

  • कुत्ते द्वारा किसी व्यक्ति को काटने या सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने की स्थिति में मालिक पूरी तरह जिम्मेदार होगा।

  • सार्वजनिक स्थानों में कुत्ते द्वारा मल―मूत्र अथवा अन्य अस्वच्छ गतिविधि की स्थिति में भी जुर्माना होगा। 

  • सामुदायिक कुत्तों (stray/community dogs) के लिए स्थानीय निवासी कल्याण संगठनों (RWA)-मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन को आहार (feeding) के लिए ज़ोन निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है।

📌 प्रवर्तन, जुर्माना और जब्ती

  • उल्लंघन करने वाले पर जुर्माना ₹ 200 से लेकर ₹ 10,000 तक निर्धारित किया गया है।

  • कब्जा (seizure) का प्रावधान है — यदि कुत्ता पंजीकरण के बाद नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे जब्त किया जा सकता है, उसके रख-रखाव खर्च मालिक पर होगा। 


3. क्यों यह विवाद का विषय बना है?

✅ पक्ष में

  • सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उचित माना जा रहा है, विशेषकर उन इलाकों में जहाँ पालतू कुत्तों और लोगों का सामना अधिक होता है।

  • पालतू मालिकों के लिए जिम्मेदारी स्पष्ट हो रही है — इससे “अत्यधिक पालतू संख्या”, “अनियंत्रित कुत्ते”, “सड़क-कुत्तों के बीच हिंसात्मक घटना” जैसी समस्याओं पर अंकुश लग सकता है।

  • सामुदायिक कुत्तों के लिए विशेष व्यवस्था (fe­eding zones, RWA ज़िम्मेदार) बनाने की दिशा में यह बदलाव सकारात्मक माना जा रहा है।

❗ विपक्ष में

  • कुछ एनीमल वेलफेयर स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि नियम बहुत अधिक सख्त हैं और उनमें अपनाने (adoption) की प्रेरणा कम हो सकती है।

  • मिक्स/इंडी कुत्तों को प्राथमिकता देने का प्रावधान कुछ लोगों को अपनाने के लिए बाधा जैसा लग रहा है।

  • इसकी अनुपालन और प्रवर्तन क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं — यानी, नियम बने हैं लेकिन लागू करना आसान नहीं होगा।


4. अगले कदम और प्रभाव

  • ये नए नियम अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं — इन्हें अंतिम स्वीकृति और अधिसूचना (notification) की प्रक्रिया से गुजरना है।

  • पालतू कुत्ते रखने वाले लोगों को अब जागरूकता बढ़ानी होगी — पंजीकरण, लेश/मज़ुल नियम, जिम्मेदारी समझना आवश्यक होगा।

  • यदि अन्य शहरों में भी इसी तरह के मॉडल अपनाए जाते हैं, तो यह देशभर में पालतू-कुत्ते नीति के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

  • विशेष रूप से, आपके जैसे पालतू-स्वामी (या भविष्य में) के लिए यह समझना जरूरी है कि कहीं आपने ऐसी नस्ल तो नहीं रखी, पंजीकरण हुआ है या नहीं — समय रहते निरीक्षण और काम पूरे रखना बेहतर रहेगा।


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद




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