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बिलासपुर |
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से तीन दिन लापता रहने के बाद बीएससी (फिजिक्स) तीसरे वर्ष के छात्र अर्सलान अंसारी का शव 23 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के तालाब में मिला। इस घटना ने कैंपस में सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है।
🕵️ घटना-क्रम
21 अक्टूबर शाम लगभग 5 बजे अर्सलान ने वीडियो कॉल पर हॉस्टल से बाहर निकलने की बात की थी — इसके बाद तीन दिन तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिली।
हॉस्टल की हाजिरी रजिस्टर में विद्यार्थी की अनुपस्थिति दर्ज नहीं हुई; वार्डन-गार्ड, सुरक्षा अधिकारी अथवा प्रबंधन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया।
24 अक्टूबर की सुबह तालाब में शव मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।
प्रशासन शुरुआत में स्पष्ट पहचान देने से बच रहा था; अस्पताल में पोस्टमॉर्टम का इंतज़ाम चल रहा है।
⚠️ उठ रहे मुख्य प्रश्न
एक छात्र हॉस्टल से कैसे और क्यों तालाब तक पहुँचा — इस दौरान हॉस्टल, वार्डन, गार्ड और सुरक्षा अधिकारी की चुप्पी क्यों रही?
तीन दिन की अनुपस्थिति को हॉस्टल दैनिक रजिस्टर में और प्रशासन द्वारा न्यूनतम जताए गए ध्यान के बावजूद अनदेखा कैसे किया गया?
क्या यह एक हादसा था, या कहीं किसी प्रकार की लापरवाही-सहायता, प्रणालीगत चूक या गुमराह करने-की कोशिश हुई?
छात्र परिषद, अभिभावक व विपक्ष प्रबंधन पर मामले को दबाने का आरोप लगा रहे हैं।
🎙️ प्रतिक्रिया-परिस्थिति
छात्रों के प्रतिनिधि संगठन ने बताया कि 130 से अधिक गार्ड और तीन-तीन वार्डन होने के बावजूद कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया।
छात्र-संघ ने पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज की जांच और एक एस.आई.टी. गठित करने की मांग की है।
परिवार विशेष रूप से युवक के पिता को बुलाए बिना शव की पूर्ण पहचान नहीं कर पा रहा है — बेटा है या नहीं, इस बात में अभी संशय है।
कुलपति का शहर से बाहर होना, प्रशासन की सक्रियता में देरी और तालाब व हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल इस केस को और गहरा बना रहे हैं।
✅ निष्कर्ष
यह घटना सिर्फ एक विद्यार्थी की मौत नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का दर्पण है — जहाँ “शैक्षणिक अनुशासन” के नाम पर संवेदनहीनता, सुरक्षा की कमी, और जिम्मेदारी की कमी ने जटिल रूप ले लिया है। कैंपस के तालाब में मिली लाश अब इसी व्यवस्था पर एक प्रश्नचिन्ह बन चुकी है: अगर यह हादसा नहीं था, तो यह कैसे हुआ?
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद
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