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📍नई दिल्ली, 07 नवंबर:
केरल के मंजेरी से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यहां एक महिला ने अपनी ही 12 वर्ष की नाबालिग बेटी के साथ अमानवीय बर्ताव करते हुए, अपने प्रेमी से उसका बलात्कार कराया। विशेष पोक्सो अदालत ने इस घृणित अपराध के लिए महिला और उसके प्रेमी – दोनों को 180 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोनों दोषियों पर ₹11.7 लाख का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला “समाज की चेतना को झकझोर देने वाला अपराध” है, जिसमें एक मां ने अपने मातृत्व को कलंकित कर दिया।
💔 क्या है पूरा मामला:
पुलिस के अनुसार, पीड़िता की मां पहले अपने पति और बच्चों के साथ तिरुवनंतपुरम में रह रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात फोन पर पलक्कड़ के एक व्यक्ति से हुई, जिससे वह बाद में प्रेम संबंध में जुड़ गई और पति को छोड़कर उसके साथ भाग गई।
दोनों ने 12 वर्ष की बच्ची के साथ मिलकर पलक्कड़ और मलप्पुरम जिलों में किराए के मकानों में रहना शुरू किया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 33 वर्षीय आरोपी प्रेमी और 30 वर्षीय मां ने दिसंबर 2019 से अक्टूबर 2021 तक 12 वर्ष की नाबालिग बच्ची के साथ कई बार यौन शोषण किया।
🍺 इस तरह रचती थी हैवानियत की साजिश:
रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला अपनी बेटी को बीयर पिलाती थी, ताकि वह नशे में हो जाए और फिर उसे अपने प्रेमी के हवाले कर देती थी। इस दौरान बच्ची का बार-बार बलात्कार किया गया।
⚖️ कोर्ट का कड़ा फैसला:
विशेष पोक्सो अदालत ने इस मामले को “दुर्लभतम” अपराध मानते हुए दोनों आरोपियों को सख्त सजा दी। उन्हें यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (IPC) और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया।
सरकारी अभियोजक सोमसुंदरन ए ने कहा —
“यह फैसला समाज को संदेश देता है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पीड़िता को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थी।”
🔹 घटना के मुख्य बिंदु:
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आरोपी: महिला (30) और उसका प्रेमी (33), पलक्कड़ निवासी
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पीड़िता: नाबालिग बेटी
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अपराध काल: दिसंबर 2019 से अक्टूबर 2021
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अपराध स्थल: पलक्कड़ और मलप्पुरम (केरल)
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सजा: 180 साल की कैद + ₹11.7 लाख जुर्माना
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कानून: POCSO, IPC, किशोर न्याय अधिनियम के तहत
यह मामला न केवल कानून बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों के लिए भी चेतावनी है — कि जब एक मां ही अपने बच्चे की रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए, तो इंसानियत का अस्तित्व ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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