Social Activity BSP
झाबुआ (मध्यप्रदेश) | Social Activity BSP
मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। चरित्र पर शक के चलते एक पति ने अपनी पत्नी की नाक हजामत बनाने वाली ब्लेड से काट दी। घटना मंगलवार शाम ग्रामीण इलाके में हुई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि महिला अस्पताल में जिंदगी और दर्द के बीच जूझ रही है।
😱 शक ने बनाई दरिंदगी की हद
पुलिस के मुताबिक, 25 वर्षीय आरोपी को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था। विवाद के दौरान उसने जेब में रखी ब्लेड निकाली और पत्नी की नाक पर वार कर दिया।
महिला लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी। आसपास के लोगों ने शोर सुनकर पुलिस को सूचना दी।
घटना के बाद आरोपी ने घायल पत्नी को खुद मोटरसाइकिल से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
🧱 गुजरात से लौटे थे पति-पत्नी
थाना प्रभारी दिनेश रावत के अनुसार, दंपती पिछले पांच महीनों से गुजरात के एक कारखाने में मजदूरी कर रहे थे।
दोनों मंगलवार को अपने छह वर्षीय बेटे के साथ गांव लौटे थे।
आरोपी को शक था कि उसकी पत्नी का कारखाने में काम करने वाले एक अन्य मजदूर से संबंध है।
इसी शक ने धीरे-धीरे हिंसा का रूप ले लिया।
🔎 नाक का हिस्सा नहीं मिला, पुलिस ने दो बार की तलाशी
पुलिस टीम ने दो बार घटनास्थल का निरीक्षण किया, लेकिन महिला की नाक का कटा हुआ हिस्सा बरामद नहीं हो सका।
थाना प्रभारी ने बताया कि संभवतः किसी जंगली जानवर या कुत्ते ने वह हिस्सा खा लिया होगा।
आरोपी ने पूछताछ में अपराध कबूल करते हुए कहा —
“मुझे लगा पत्नी गलत रास्ते पर जा रही है, इसलिए सबक सिखाने के लिए ऐसा किया।”
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
🏥 महिला की हालत स्थिर, लेकिन प्लास्टिक सर्जरी जरूरी
घायल महिला झाबुआ जिला अस्पताल में भर्ती है।
सिविल सर्जन डॉ. एम.एल. मालवीय ने बताया —
“महिला की नाक का लगभग 50 फीसदी हिस्सा कट चुका है। उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है, लेकिन प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत होगी।”
⚖️ कानूनी कार्रवाई जारी
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 326 (गंभीर चोट पहुंचाना) और अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया है।
मामले की जांच जारी है और पुलिस ने कहा है कि यदि महिला के बयान में और तथ्य सामने आए, तो अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जाएंगी।
❗ सवाल बाकी है…
यह घटना सिर्फ एक घरेलू विवाद नहीं, बल्कि उस बीमार सोच की तस्वीर है, जो “शक” के नाम पर औरत की देह को सज़ा का ज़रिया बना देती है।
कानून और समाज — दोनों के लिए अब यह सवाल है कि
“कब तक ‘चरित्र पर शक’ जैसे बहाने महिलाओं की ज़िंदगी का नाक काटेंगे?”
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





.jpeg)

