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नई दिल्ली, 30 नवंबर: टीम इंडिया के युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल एक बार फिर उसी पुरानी कमजोरी का शिकार बने, जिसने पिछले साल साउथ अफ्रीका टेस्ट सीरीज में भी उन्हें खूब परेशान किया था। रांची में खेले गए पहले वनडे में जायसवाल की शानदार शुरुआत के बावजूद उनकी पारी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नांद्रे बर्गर ने उन्हें 18 रन पर पवेलियन भेजते हुए भारत को शुरुआती झटका दिया।
जायसवाल ने धमाकेदार अंदाज में बल्लेबाजी की शुरुआत की थी। पहली ही गेंद पर चौका और तीसरे ओवर में शानदार छक्का लगाकर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए थे। लेकिन 16वीं गेंद पर बाहर जाती हुई बर्गर की डिलीवरी उनके बल्ले से किनारा लेकर सीधे विकेटकीपर डिकॉक के दस्तानों में चली गई। आउट होने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ—क्या यशस्वी बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों को समझ नहीं पाते?
बाएं हाथ के गेंदबाज—यशस्वी की सबसे बड़ी कमजोरी!
आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि जायसवाल लेफ्ट-आर्म पेस के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्हें सबसे अधिक बार आउट करने वाले गेंदबाजों की सूची देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है:
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मार्को यानसन – 4 बार आउट
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नांद्रे बर्गर – 4 बार आउट
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मिचेल स्टार्क – 3 बार आउट
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जोफ्रा आर्चर – 3 बार आउट
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स्कॉट बोलैंड – 3 बार आउट
इतने आंकड़े साबित करते हैं कि जायसवाल के लिए लेफ्ट-आर्म पेस एक बड़ी तकनीकी चुनौती बन चुका है।
गावस्कर ने बताई तकनीकी कमी
मैच के दौरान कमेंट्री करते हुए महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बताया कि जायसवाल का फ्रंट फुट सही तरह आगे नहीं बढ़ रहा है, जिससे वे बाएं हाथ के गेंदबाज की "अवे स्विंग" पर बार-बार असफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर यशस्वी इस तकनीकी खामी को जल्द नहीं सुधारते, तो बड़े मैचों में यह कमजोरी उन्हें लगातार परेशान करती रहेगी।
क्या इस कमजोरी को ताकत में बदल पाएंगे यशस्वी?
भारत को आगे इस सीरीज में उनकी जरूरत होगी। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या जायसवाल लेफ्ट-आर्म पेस के खिलाफ अपनी तकनीक पर काम करके इस कमजोरी को ताकत में बदल पाते हैं या नहीं। अगर नहीं, तो उनकी जगह पर सवाल उठना शुरू हो सकता है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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