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भटगांव में नेशनल हाईवे 130B की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) जारी होते ही आम नागरिकों और व्यापारियों में गहरी निराशा फैल गई है। लंबे समय से भटगांव और सरसींवा क्षेत्र के लिए बाईपास रोड की मांग की जा रही थी, लेकिन डीपीआर में हाईवे को नगर के भीतर से ले जाने के प्रस्ताव की जानकारी सामने आने के बाद व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि हाईवे नगर के मुख्य बाजार और घनी आबादी वाले क्षेत्र से होकर गुजरेगा, तो इससे व्यापार पर भारी असर पड़ेगा। कई घर और दुकानें भूमि अधिग्रहण की जद में आ सकती हैं, जिससे लोगों के जीवन-यापन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि हाईवे निर्माण के बाद स्थानीय बाजार लगभग समाप्त हो सकता है, जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।
नागरिकों ने बताया कि वे पहले ही क्षेत्र की सांसद कमलेश जांगड़े से मुलाकात कर भटगांव–सरसींवा के लिए बाईपास निर्माण का प्रस्ताव रख चुके हैं। इसके बावजूद डीपीआर में बाईपास का प्रावधान शामिल न होना लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि भटगांव एक पुराना और ऐतिहासिक नगरीय क्षेत्र है, जो पूर्व रायपुर जिले के समय से नगर पालिका के रूप में अस्तित्व में रहा है। समय के साथ आसपास के कई क्षेत्र नगर पालिका बन चुके हैं, लेकिन भटगांव आज भी नगर पंचायत है, जिसके कारण यहां की जनसंख्या, व्यापारिक गतिविधियों और जरूरतों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है।
नागरिकों और व्यापारियों ने शासन-प्रशासन से पुनः मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए भटगांव के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जाए और हाईवे का मार्ग परिवर्तित कर बाईपास का निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल नगर की आर्थिक गतिविधियां सुरक्षित रहेंगी, बल्कि भविष्य में यातायात की गंभीर समस्याओं से भी क्षेत्र को राहत मिलेगी। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बाईपास की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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