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बिलासपुर | नगर संवाददाता
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में सिटी कोतवाली रोड के आसपास स्थित दुकानों को हटाने के निर्देश के बाद स्थानीय गरीब दुकानदारों और नागरिकों में चिंता का माहौल बन गया है। यह इलाका लंबे समय से “शनिवार मार्केट” के नाम से जाना जाता है, जहाँ हर सप्ताह शनिवार को अस्थायी रूप से दुकानें लगती हैं।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, यह शनिवार मार्केट केवल सप्ताह में एक दिन, शनिवार को सुबह 4 बजे से सुबह 11 बजे तक संचालित होती है। निर्धारित समय के बाद दुकानदार स्वयं अपनी दुकानें हटा लेते हैं। ये दुकानें किसी भी प्रकार का स्थायी या पक्का निर्माण नहीं हैं, बल्कि सड़क के किनारे अस्थायी रूप से लगाई जाती हैं।
हालाँकि जारी आदेश में दुकानों के कारण यातायात बाधित होने की बात कही गई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि शनिवार मार्केट के चलते न तो स्थायी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है और न ही आम नागरिकों को कोई गंभीर परेशानी होती है। बाजार सीमित समय के लिए लगता है और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शनिवार मार्केट में दुकान लगाने वाले अधिकांश लोग गरीब, मजदूर और निम्न आय वर्ग से आते हैं। इन दुकानों से होने वाली आमदनी ही उनके परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है। यदि इन दुकानों को हटाया जाता है, तो बड़ी संख्या में गरीब परिवारों की रोज़ी-रोटी छिनने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि प्रशासन को अवैध स्थायी निर्माण और गरीबों द्वारा लगाई जाने वाली अस्थायी दुकानों के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहिए। शनिवार मार्केट वर्षों से शहर की पहचान का हिस्सा रहा है और इसे पूरी तरह हटाने से सामाजिक व आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।
फिलहाल, सिटी कोतवाली रोड और उसके आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रशासन के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि कानून व्यवस्था के साथ-साथ गरीब दुकानदारों के जीवन-यापन की भी रक्षा हो सके।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद






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