Social Activity BSP
बिलासपुर, 12 फरवरी। (Social Activity BSP)
छत्तीसगढ़ मितानिन (आशा) यूनियन के बैनर तले आज जिले की सैकड़ों मितानिन (आशा) कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
मितानिनों ने कहा कि वे वर्ष 2003 से स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, टीकाकरण अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रम, कुपोषण उन्मूलन, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, जन-जागरूकता अभियान चलाना—इन सभी कार्यों में मितानिनों की भूमिका अहम रही है।
कोविड काल में निभाई अग्रिम पंक्ति की भूमिका
यूनियन ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब मितानिनें घर-घर जाकर सर्वे, जांच, दवा वितरण और जागरूकता अभियान में जुटी रहीं। अपनी और अपने परिवार की परवाह किए बिना उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दी। बावजूद इसके, उन्हें आज भी सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रमुख मांगें विस्तार से:
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सम्मानजनक मानदेय – वर्तमान प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर न्यूनतम 10,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए तथा राज्यांश 75% से बढ़ाकर 100% किया जाए।
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नियमित भुगतान – मानदेय प्रत्येक माह की 6 तारीख तक अनिवार्य रूप से दिया जाए तथा लंबित बकाया राशि का शीघ्र भुगतान हो।
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शासकीय कर्मचारी का दर्जा – मितानिनों को स्वास्थ्य विभाग में नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
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सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू हों – पीएफ (भविष्य निधि), पेंशन, ग्रेच्युटी एवं चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए।
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बीमा एवं दुर्घटना सहायता – आकस्मिक मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में बीमा राशि में वृद्धि की जाए तथा परिवार को समुचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
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सेवानिवृत्ति लाभ – रिटायरमेंट के पश्चात 5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए।
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प्रोत्साहन राशि का भुगतान – केंद्र सरकार द्वारा घोषित अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि एवं पूर्व में घोषित बढ़ोतरी का पूर्ण भुगतान किया जाए।
प्रशासन से सकारात्मक पहल की मांग
रैली के दौरान मितानिनों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन आर्थिक रूप से अत्यंत कठिन परिस्थितियों में कार्य करने को मजबूर हैं। यूनियन पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए।
ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधियों ने बताया कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
📌 Social Activity BSP लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है। आगे की अपडेट के लिए जुड़े रहें।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद

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