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बिलासपुर। शहर में आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक नई पहल “मनसयुक्ति” की शुरुआत की गई है। यह अभियान अरपा अर्पण महाअभियान “जन आंदोलन” के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इसके तहत आमजन को रिहेबिलिटेशन, मेडिटेशन, योग और प्रशामक सेवा (लाइलाज बीमारी के अंतिम चरण के मरीजों की देखभाल) जैसी समग्र स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
🧠 ‘मनसचेतना’ कार्यशाला का आयोजन
अभियान के पहले चरण में संस्थापक डॉ. सुजाता पाण्डेय ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, स्कूल प्राचार्यों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में आत्महत्या रोकथाम विषय पर “मनसचेतना” कार्यशाला आयोजित की।
कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों, सामाजिक भेदभाव और समय रहते व्यवहारिक संकेतों की पहचान पर विस्तार से चर्चा की गई।
📊 NCRB आंकड़ों ने जताई चिंता
प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, National Crime Records Bureau (NCRB) के डेटा में छत्तीसगढ़ में प्रति एक लाख आबादी पर 26 आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 11 प्रति लाख है। विशेषज्ञों ने इन आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए सक्रिय रोकथाम रणनीति की जरूरत बताई।
🌍 WHO की ‘Live Life’ रणनीति पर जोर
कार्यक्रम में World Health Organization (WHO) की “Live Life” रणनीति की जानकारी दी गई, जिसमें—
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L – Limit Access: आत्महत्या के साधनों की उपलब्धता कम करना
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I – Interaction with Media: जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग
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F – Foster Life Skills: युवाओं में जीवन कौशल का विकास
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E – Early Identification: जोखिम वाले व्यक्तियों की समय रहते पहचान
🎯 मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन पर फोकस
आयोजकों के अनुसार, “मनसयुक्ति” का उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या जैसी घटनाओं में कमी लाना है। अभियान में रोकथाम, व्यवहारिक उपचार और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अभियान की जानकारी संस्थापक/अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने साझा की।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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