भू-विस्थापितों की अनदेखी के विरोध में 3 फरवरी को गेवरा खदान बंद करने का ऐलान

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कोरबा | 02 फरवरी 2026

छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS) एवं भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने एसईसीएल की गेवरा परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापित किसानों को 100 प्रतिशत वैकल्पिक रोजगार देने सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 3 फरवरी 2026 को गेवरा खदान और साइलो बंद करने का ऐलान किया है।

संगठनों का आरोप है कि प्रभावित किसानों की मांगों को लेकर कई बार प्रबंधन से वार्ता की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिए गए और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी उपेक्षा के चलते खदान बंद आंदोलन का निर्णय लिया गया है।

हड़ताल की घोषणा से पूर्व एसईसीएल गेवरा प्रबंधन ने किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। बैठक में किसान सभा की ओर से दीपक साहू, दामोदर श्याम, प्रशांत झा, गुलाब दास एवं रमेश दास शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने बताया कि इस बार भी प्रबंधन ने किसी ठोस निर्णय के बजाय केवल मौखिक आश्वासन दिए, जिसे संगठनों ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद वार्ता को विफल घोषित करते हुए खदान बंद आंदोलन की घोषणा की गई।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि खदान विस्तार के नाम पर ग्रामीणों की पूरी जमीन अधिग्रहित कर ली जाती है, लेकिन रोजगार देने के समय प्रभावित परिवारों को 100 प्रतिशत रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 30 प्रतिशत रोजगार बाहरी लोगों को देकर भू-विस्थापितों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, जिससे विस्थापित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि आउटसोर्सिंग कार्यों में भी भू-विस्थापितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। उन्होंने बिना सेफ्टी जोन बनाए खदान विस्तार को नियमों का खुला उल्लंघन बताया और पहले सेफ्टी जोन सुनिश्चित करने की मांग की।

वहीं भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के सचिव दामोदर श्याम ने हेवी ब्लास्टिंग पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे आसपास के गांवों में मकानों को नुकसान पहुंच रहा है। उड़ती धूल-डस्ट से लोगों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, घरेलू सामान तक खराब हो रहे हैं, लेकिन अब तक कोई क्षतिपूर्ति नहीं दी गई है।

संगठनों ने बताया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव बैठकें की जा रही हैं, जिन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो 3 फरवरी को गेवरा खदान बंद कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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