Social Activity BSP
बिलासपुर, 01 फरवरी (Social Activity BSP)।
बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग ने एक 29 वर्षीय युवती के जीवन में नई मुस्कान लौटा दी है। युवती के बाहर निकले दांतों और असंतुलित जबड़े की जटिल आर्थोगनेथिक सर्जरी को डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। खास बात यह रही कि निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होने वाला यह इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया।
लिंगियाडीह निवासी युवती लंबे समय से अपने चेहरे की बनावट को लेकर मानसिक तनाव और हीन भावना से जूझ रही थी। हंसते समय उसके ऊपरी दांत और मसूड़े अत्यधिक दिखाई देते थे, जिससे वह सामाजिक रूप से असहज महसूस करती थी।
जांच में सामने आई जबड़े की गंभीर समस्या
अपनी परेशानी लेकर युवती सिम्स अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग पहुंची। एक्स-रे, सीटी स्कैन और आवश्यक रक्त जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसका ऊपरी जबड़ा सामान्य से बड़ा, निचला जबड़ा छोटा, होंठ छोटे और दांत बाहर की ओर निकले हुए थे। इसके बाद चरणबद्ध उपचार योजना बनाई गई।
पहले ब्रेसेस, फिर जटिल सर्जरी
इलाज की शुरुआत दांतों में ब्रेसेस (तार) लगाकर उनके सही विन्यास से की गई। दांतों को अंदर की ओर समायोजित करने के बाद सर्जरी द्वारा जबड़े की हड्डियों को संतुलित आकार दिया गया।
6–7 घंटे चली हाई-टेक सर्जरी
करीब 6 से 7 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी को तीन प्रमुख चरणों में पूरा किया गया।
पहले चरण में लेफोर्ट-1 ओस्टियोटोमी के जरिए ऊपरी जबड़े को छोटा किया गया।
दूसरे चरण में बाइलेटरल सैजिटल स्प्लिट ओस्टियोटोमी (BSSO) के माध्यम से निचले जबड़े को आगे बढ़ाया गया।
अंतिम चरण में जीनियोप्लास्टी कर ठुड्डी की हड्डी को संतुलित आकार दिया गया। इस प्रक्रिया से युवती के चेहरे को संतुलित और प्राकृतिक स्वरूप मिला।
छत्तीसगढ़ में सिम्स की बड़ी उपलब्धि
सिम्स प्रशासन का दावा है कि छत्तीसगढ़ का यह पहला मेडिकल कॉलेज अस्पताल है, जहां दंत चिकित्सा विभाग द्वारा नियमित रूप से इस तरह की आर्थोगनेथिक सर्जरी की जा रही है। निजी अस्पतालों में इसी उपचार पर 2 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है।
अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने किया ऑपरेशन
यह जटिल ऑपरेशन दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलो-फेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश और उनकी टीम द्वारा किया गया। टीम में डॉ. जंडेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी कीनीकर, डॉ. हेमलता राजमणि, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. सोनल पटेल, रेडियो डायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह और निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति शामिल रहीं।
इस सफल सर्जरी के बाद युवती न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ है, बल्कि आत्मविश्वास के साथ नई जिंदगी की शुरुआत भी कर रही है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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