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बिलासपुर। शहर में आयोजित प्रेस वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता जे.पी. देवांगन ने आदिवासी अधिकार, वन भूमि और हसदेव अरण्य संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि कई आदिवासी परिवार तीन पीढ़ियों से जंगलों में रह रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें अब तक वन अधिकार पट्टा नहीं मिला है। उन्होंने मांग की कि जिन दावों पर निर्णय लंबित है, उनके निपटारे तक किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए।
देवांगन ने आरोप लगाया कि हाल ही में आदिवासियों की झोपड़ियां तोड़े जाने और करीब 36 घरों को जलाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जो बेहद गंभीर हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए एसटी-एसटी एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने नगर पंचायत पर 22 तालाबों से अतिक्रमण हटाने में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तालाबों की जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा है, जो पर्यावरण और जनहित के खिलाफ है।
हसदेव अरण्य क्षेत्र में हो रही जंगल कटाई और कोयला खनन को लेकर भी उन्होंने चिंता जताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की।
प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने कहा कि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद

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