Social Activity BSP
बिलासपुर (Social Activity BSP)। गर्मी के मौसम में पानी की बढ़ती किल्लत के बीच अब जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने वाली है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण-2 के तहत ग्राम पंचायतों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली (DEWATS) को लागू किया जा रहा है।
नदियों और तालाबों को मिलेगा संरक्षण
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नालियों, नदियों और तालाबों में जाने से रोकना है। इसके जरिए अपशिष्ट जल का उपचार कर उसे दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाएगा, जिससे जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
क्या है DEWATS प्रणाली
DEWATS एक किफायती और प्रकृति-आधारित तकनीक है, जो पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी मानी जाती है। इसमें रासायनिक प्रक्रियाओं के बजाय सूक्ष्मजीवों और पौधों की मदद से पानी का शोधन किया जाता है।
इस प्रणाली की खासियत यह है कि अपशिष्ट जल का उपचार उसी स्थान पर किया जाता है, जहां वह उत्पन्न होता है।
उपयोग में आएगा उपचारित पानी
इस प्रक्रिया से शुद्ध किया गया पानी बागवानी, कृषि कार्य और शौचालय फ्लशिंग जैसे कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा। इससे भूजल स्तर में सुधार के साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
46 गांवों में काम, 25 पूर्ण
जिले में इस योजना के तहत कुल 46 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 25 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 21 कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।
अधिकारियों का बयान
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल के अनुसार, इस पहल से न केवल पानी की बर्बादी रुकेगी, बल्कि ओडीएफ प्लस लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी। यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल समाधान साबित होगी।
निष्कर्ष
बिलासपुर जिले में शुरू की गई यह पहल जल संकट से निपटने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद







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