Breaking News - कोटा ब्लॉक में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: सैकड़ों लोग पहुंचे कलेक्टर-एसपी कार्यालय, 15 दिन का अल्टीमेटम

Social Activity BSP

बिलासपुर (Social Activity BSP)। जिले के कोटा ब्लॉक में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। आज आजाद युवा संगठन के बैनर तले क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्टर और एसपी कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी, ग्रामीण परेशान

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि कोटा क्षेत्र के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांवों में वर्षों पुराने तालाब जर्जर हालत में हैं, जिससे जल संरक्षण और उपयोग दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में—

  • तालाबों पर पचरी (घाट) निर्माण
  • 500 से 600 मीटर तक सड़कों का निर्माण और मरम्मत
  • शमशान घाट में शेड निर्माण
  • पेयजल संकट दूर करने के लिए हैंडपंप और बोर की व्यवस्था
  • बंद पड़ी नल-जल योजनाओं को पुनः चालू करना शामिल है

पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण

ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में हैंडपंप खराब पड़े हैं या पाइप की कमी के कारण काम नहीं कर रहे। ऐसे में लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। गर्मी के इस मौसम में हालात और भी गंभीर हो गए हैं।

15 दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

आजाद युवा संगठन के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि यदि प्रशासन ने तय समय सीमा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


दूसरी बड़ी खबर: चंगोरी पंचायत में दबंगई का आरोप

कोटा ब्लॉक की चंगोरी पंचायत से भी एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां आवासपारा के 6 परिवारों ने गांव के ही कुछ लोगों पर दबंगई और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

मारपीट और कब्जे की कोशिश का आरोप

पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि गांव के भक्तिराम शिकारी और उसके परिजनों द्वारा उनके साथ मारपीट, गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। साथ ही उनकी जमीन और मकान पर जबरन कब्जा करने की कोशिश भी की जा रही है।

पीएम आवास निर्माण में बाधा

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 50-60 वर्षों से उस जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन अब उनके प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकानों में भी बाधा डाली जा रही है।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस और पंचायत में शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनका भय और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों की मांगें

  • आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए
  • पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए

प्रशासन पर उठे सवाल, बढ़ रहा आक्रोश

दोनों ही मामलों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दबंगई और उत्पीड़न के मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

फिलहाल अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि तय समय सीमा में समस्याओं का समाधान होता है या आंदोलन और तेज होता है।




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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद




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