रायपुर/विशाखापत्तनम। बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात ‘मोंथा (Montha)’ मंगलवार देर रात आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट से टकराया, जिससे तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं और भारी बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, तूफ़ान के दौरान हवाओं की रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई। कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली व्यवस्था बाधित हुई और घरों की छतें उड़ गईं।
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य प्रशासन ने करीब 76,000 लोगों को राहत शिविरों में भेजा है और 200 से ज़्यादा मेडिकल कैंप लगाए गए हैं।
चक्रवात का प्रभाव अब ओडिशा, तेलंगाना, झारखंड और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 24 से 48 घंटों के दौरान इन राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और जशपुर जिलों में बुधवार से शुक्रवार तक पीली और नारंगी चेतावनी जारी की गई है। कई जगहों पर 40 से 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, तूफ़ान से करीब 38 हजार हेक्टेयर फसलों और 1.38 लाख हेक्टेयर बागवानी क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। किसानों को खेतों में पानी निकासी और फसल संरक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, रेलवे और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं — कई ट्रेनों को रद्द किया गया और उड़ानों को स्थगित किया गया है।
फिलहाल, ‘मोंथा’ की तीव्रता थोड़ी घटकर साइक्लोनिक स्टॉर्म स्तर पर आ गई है, लेकिन इससे जुड़ा खतरा अभी टला नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश का असर मध्य भारत तक देखने को मिल सकता है।
IMD ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद


