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सरगुजा।
हिजाब से जुड़े हालिया विवाद को लेकर सामाजिक संगठन रज़ा यूनिटी फाउंडेशन ने कड़ा ऐतराज़ जताते हुए बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को एक औपचारिक पत्र भेजा है। पत्र के माध्यम से संगठन ने इस मुद्दे पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री से स्पष्ट, संवेदनशील और न्यायसंगत रुख अपनाने की मांग की है।
रज़ा यूनिटी फाउंडेशन का कहना है कि हिजाब संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों का अभिन्न हिस्सा है। संगठन के अनुसार, किसी भी महिला को उसकी धार्मिक आस्था या पहनावे के आधार पर शिक्षा, रोजगार या सार्वजनिक जीवन से वंचित करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के भी विरुद्ध है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं को धर्मनिरपेक्ष राजनीति का समर्थक बताते रहे हैं, ऐसे में इस संवेदनशील मुद्दे पर उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। देश के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण जिस तरह की परेशानियों, भेदभाव और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
महिला विंग ने उठाई महिला अधिकारों की आवाज
रज़ा यूनिटी फाउंडेशन की महिला विंग की सदस्यों ने विशेष रूप से इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हिजाब किसी पर थोपी गई परंपरा नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की आस्था, पहचान और व्यक्तिगत पसंद से जुड़ा विषय है। इसे शिक्षा या सार्वजनिक जीवन से जोड़कर प्रतिबंध का कारण बनाना संविधान की मूल भावना और महिला सशक्तिकरण की अवधारणा के खिलाफ है।
महिला विंग की सदस्यों ने यह भी कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में महिलाओं को यह अधिकार होना चाहिए कि वे अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार जीवन जी सकें, बिना किसी डर या भेदभाव के।
बिहार सरकार से रखी गई प्रमुख मांगें
रज़ा यूनिटी फाउंडेशन एवं उसकी महिला विंग ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निम्नलिखित मांगें की हैं—
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विवाद से जुड़ी महिला से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
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अल्पसंख्यक समुदाय की छात्राओं के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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मुख्यमंत्री स्वयं इस विषय पर स्पष्ट और सकारात्मक बयान देकर देश में सौहार्द व समानता का संदेश दें।
शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी
अंत में रज़ा यूनिटी फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर संवेदनशीलता, स्पष्टता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण नहीं अपनाया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने विरोध को आगे भी जारी रखेगा। संगठन ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि संविधान में निहित अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद







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