Social Activity BSP
रायपुर, 20 जनवरी (Social Activity BSP)।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में सामने आए करोड़ों रुपये के रीएजेंट खरीदी घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस बहुचर्चित मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
EOW ने पंचकुला स्थित फर्म ‘रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स’ के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, लाइजनर प्रिंस जैन तथा रायपुर की फर्म ‘शारदा इंडस्ट्रीज’ के प्रोप्राइटर राकेश जैन को हिरासत में लिया है। तीनों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हमर लैब योजना’ के तहत आम जनता को निशुल्क जांच सुविधा देने के नाम पर मेडिकल उपकरणों और रीएजेंट की खरीदी में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि मोक्षित कॉरपोरेशन ने अन्य फर्मों के साथ मिलकर पूल टेंडरिंग और कार्टलाइजेशन के जरिए ठेका हासिल किया, जिससे प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, निविदा प्रक्रिया के दौरान संबंधित फर्मों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में उत्पादों का विवरण, पैक साइज और तकनीकी जानकारियां एक ही पैटर्न और भाषा में भरी गई थीं, जो आपसी मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा करती हैं। आरोप है कि मोक्षित कॉरपोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से लगभग तीन गुना अधिक दर पर सामग्री की आपूर्ति की, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
प्रारंभिक जांच में इस संगठित सिंडिकेट के कारण शासन को करीब 550 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है। फर्जी दस्तावेजों, आपसी सांठगांठ और सुनियोजित तरीके से की गई इस कथित धोखाधड़ी में आने वाले दिनों में और भी बड़े नामों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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