Social Activity BSP
नई दिल्ली। (Social Activity BSP)
अब पर्सनल लोन सिर्फ लग्ज़री ट्रिप या महंगे गैजेट्स तक सीमित नहीं रह गया है। देश में लोगों के कर्ज़ लेने की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है मेडिकल इमरजेंसी। पैसाबाजार की हालिया कंज्यूमर रिसर्च रिपोर्ट ‘द पर्सनल लोन स्टोरी’ ने भारतीय परिवारों की बिगड़ती आर्थिक सेहत की एक चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है।
इलाज बन रहा कर्ज़ की सबसे बड़ी वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 11% लोग बीमारी और अस्पताल के भारी खर्चों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन लेने को मजबूर हैं। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि इलाज की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बड़ी आबादी आज भी पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस से वंचित है।
देश के महानगरों में हालात और ज्यादा गंभीर हैं।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे टियर-1 शहरों में मेडिकल इमरजेंसी के लिए लोन लेने वालों का आंकड़ा 14% तक पहुंच चुका है। वहीं टियर-2 शहरों में यह 10% और टियर-3 शहरों में 8% दर्ज किया गया है।
घर की मरम्मत भी बना कर्ज़ का कारण
बीमारी के अलावा, घर की जरूरतें और अचानक आने वाली मरम्मत भी लोगों को कर्ज़ लेने पर मजबूर कर रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि करीब 48% लोग घर की देखरेख और मरम्मत के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं।
लाइफस्टाइल और बिजनेस के लिए भी बढ़ा कर्ज़
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि
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36% लोग अपनी लाइफस्टाइल सुधारने और इच्छाएं पूरी करने के लिए लोन ले रहे हैं
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जबकि 16% लोग बिजनेस से जुड़ी जरूरतों और विस्तार के लिए पर्सनल लोन का सहारा ले रहे हैं
मिडिल क्लास का बदला मिज़ाज
यह रिसर्च देश के 23 शहरों और कस्बों में 2,889 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट बताती है कि टियर-3 शहरों के लोग रोजमर्रा के खर्चों के लिए टियर-1 शहरों की तुलना में 2.4 गुना ज्यादा पर्सनल लोन ले रहे हैं।
वहीं मिडिल क्लास की तस्वीर कुछ अलग है।
7.5 लाख से 10 लाख रुपये सालाना आय वाले वर्ग में 40% लोग अपनी दबी हुई इच्छाओं को पूरा करने के लिए लोन ले रहे हैं।
ब्याज नहीं, जरूरतें तय कर रही हैं फैसले
पैसाबाजार की सीईओ संतोष अग्रवाल के अनुसार,
“अब लोग सिर्फ ब्याज दरें देखकर लोन नहीं लेते। उनकी ज़रूरतें, जीवन के अहम मोड़ और अचानक आई चुनौतियां उनके फैसलों को ज्यादा प्रभावित कर रही हैं।”
नतीजा
यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि देश में बढ़ती महंगाई, महंगा इलाज और सीमित बीमा कवरेज लोगों को कर्ज़ के जाल में धकेल रहा है। पर्सनल लोन अब शौक नहीं, बल्कि ज़रूरत और मजबूरी बनता जा रहा है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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