Social Activity BSP
बिलासपुर, 25 फरवरी (Social Activity BSP)।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद बिलासपुर में खुलेआम रेत माफिया सक्रिय हैं। शहर से लगे नेशनल हाईवे-130 के आसपास सेंदरी, घुटकू, लोखंडी (रामघाट), मंगला, छठघाट, दो मुहानी और ढेका समेत कई घाटों पर रातभर अवैध खनन और परिवहन जारी है।
ड्रोन कैमरे से लिए गए वीडियो और तस्वीरों में नदी के बीच दर्जनों ट्रैक्टर रेत निकालते नजर आए। रविवार देर रात करीब 3 बजे सेंदरी घाट पर ड्रोन से ली गई तस्वीरों में 9 ट्रैक्टर रेत लोड करते दिखे। वहीं घुटकू घाट पर भी इसी तरह का संगठित नेटवर्क सक्रिय मिला, जहां करीब 10 ट्रैक्टर एक साथ लोडिंग में जुटे थे।
150 मीटर ऊंचाई से दिखा सच
लोखंडी के रामघाट में दोपहर करीब 2 बजे 150 मीटर की ऊंचाई से ड्रोन से ली गई तस्वीर में 22 ट्रैक्टर नदी के बीच सक्रिय नजर आए। साफ रेत निकालने के लिए 25 से अधिक ट्रैक्टर नदी की तेज धारा में उतारे जा रहे हैं। फंसने की स्थिति में दो-तीन इंजन लगाकर उन्हें बाहर निकाला जाता है।
रामघाट तक पहुंचने के तीन प्रमुख रास्ते हैं—
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बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे
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सेंदरी बाइपास होकर कोनी मार्ग
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स्थानीय आंतरिक सड़क
इन्हीं मार्गों से रातभर रेत की ढुलाई की जा रही है।
निगरानी के लिए तैनात ‘सूचना तंत्र’
घाटों तक जाने वाले रास्तों में जानबूझकर रेत के ढेर और अवरोध लगाए गए हैं, ताकि बाहरी लोगों की आवाजाही मुश्किल हो सके। स्थानीय लोगों के अनुसार, घाटों के आसपास कुछ युवक मोबाइल लेकर तैनात रहते हैं। कार्रवाई की भनक लगते ही 20 से 30 मिनट के भीतर पूरा घाट खाली करा दिया जाता है। ट्रैक्टर-ट्रॉला पहले से स्टार्ट स्थिति में तैयार रहते हैं।
सेंदरी घाट पर मौके से पांच ट्रैक्टर रेत लेकर निकलते दिखे, जबकि दो युवक संदिग्ध स्थिति में निगरानी करते पाए गए। घुटकू घाट पर भी इसी तरह की व्यवस्था नजर आई।
प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत
प्रशासन का दावा है कि खनिज विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम सक्रिय है। लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। रातभर खनन और परिवहन होता रहा, पर मौके पर न तो कोई जांच दिखी और न ही रोकथाम की कार्रवाई।
गौरतलब है कि हाल ही में रेत माफिया द्वारा एक नायब तहसीलदार को कुचलने की कोशिश की घटना सामने आई थी, जिसके बाद भी हालात में सुधार नहीं दिख रहा।
इस पूरे मामले में खनिज विभाग के उप संचालक केके गोलघाटे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल और संदेश का कोई जवाब नहीं मिला।
वैध घाट कम, अवैध ज्यादा
जिले में अमलडीहा, उदईबंद, सोढ़ाखुर्द और करहीकछार घाट को ही वैध घोषित किया गया है। इसके बावजूद प्रतिदिन 15 से 20 घाटों से अवैध रूप से रेत निकाले जाने की जानकारी सामने आ रही है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अवैध रेत कारोबार में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के कुछ नेताओं के साथ शराब कारोबारी भी शामिल हैं। बताया जाता है कि जब विभागीय अधिकारी छापेमारी कर वाहनों को जब्त करते हैं, तो कथित रूप से दबाव बनाकर उन्हें छुड़वा लिया जाता है।
शराब और पैसों के बदले रातभर पहरा
सूत्रों के अनुसार, रेत घाटों पर मुखबिरी और निगरानी के लिए लोगों को पैसे के साथ शराब उपलब्ध कराई जाती है। ट्रैक्टर ड्राइवर, मजदूर और सहयोगी पूरी रात सक्रिय रहते हैं और सुबह होते ही लौट जाते हैं। लंबे समय से शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से माफिया के हौसले बुलंद हैं।
अरपा नदी का लगातार दोहन न केवल पर्यावरणीय संकट को बढ़ा रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यदि हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले समय में इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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