कुलपति सम्मेलन में ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र’ जारी, विश्वविद्यालयों के रूपांतरण का संकल्प

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बिलासपुर, 23 फरवरी (Social Activity BSP)।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को देशभर से आए कुलपतियों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भारतीय उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से ऐतिहासिक ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र’ (Bilaspur Declaration) जारी किया।

इस घोषणा-पत्र के माध्यम से विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री प्रदाता संस्थान नहीं, बल्कि समग्र मानव विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय आत्मविश्वास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।


21वीं सदी की चुनौतियों पर मंथन

सम्मेलन में ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं, बदलती वैश्विक परिस्थितियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण को आधार बनाते हुए 11 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि भारत को ज्ञान-आधारित विश्व नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए अपने विश्वविद्यालयों को नवाचार, समावेशन और नैतिक मूल्यों से सशक्त करना होगा।


समग्र शिक्षा पर विशेष जोर

घोषणा-पत्र में स्पष्ट किया गया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक उत्पादकता तक सीमित नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालयों को मूल्य-आधारित नेतृत्व, नैतिक तर्क क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता के विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।


शैक्षणिक स्वायत्तता और नवाचार

सम्मेलन में विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की गई कि वे एनईपी 2020 के प्रावधानों के अनुरूप अपनी शैक्षणिक स्वायत्तता का प्रभावी उपयोग करें। बहु-विषयक, लचीले और क्रेडिट-आधारित पाठ्यक्रम विकसित कर छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने पर बल दिया गया।


अकादमिक–उद्योग–समाज समन्वय

रोजगारपरक शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, सरकार और समाज के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विश्वविद्यालयों को नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया गया।


उत्तरदायी AI और कौशल विकास

घोषणा-पत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक, पारदर्शी और समावेशी उपयोग की वकालत की गई। ‘ग्लोबल साउथ’ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी दक्षता को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी।


अनुभवात्मक अधिगम और सामाजिक जुड़ाव

कक्षा-केंद्रित शिक्षण से आगे बढ़कर फील्डवर्क, इंटर्नशिप, अनुसंधान और सामुदायिक सहभागिता को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया। ग्रामीण-शहरी इंटरफेस को पाठ्यक्रम में शामिल कर सामाजिक असमानताओं को कम करने की दिशा में पहल करने पर जोर दिया गया।


सांस्कृतिक और भाषाई सशक्तिकरण

घोषणा-पत्र में भारतीय संस्कृति, विरासत, भाषाओं और स्वदेशी ज्ञान परंपराओं से शिक्षा को पुनः जोड़ने की आवश्यकता रेखांकित की गई। ज्ञान प्रणालियों के डिकोलोनाइजेशन और बहुलवादी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।

साथ ही, क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं को शिक्षण एवं अनुसंधान के प्रभावी माध्यम के रूप में सशक्त करने तथा पाठ्यपुस्तकों और शोध सामग्री के बहुभाषी अनुवाद को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।


उच्च शिक्षा के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज

सम्मेलन के समापन पर प्रतिभागियों ने ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र’ को उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज बताते हुए इसे प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प दोहराया।

आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह घोषणा-पत्र विश्वविद्यालयों के रूपांतरण की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा और भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेगा।


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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