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बिलासपुर | नगर संवाददाता
बिलासपुर के सिटी कोतवाली रोड और उसके आसपास स्थित प्रसिद्ध शनिवार मार्केट को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब गरीब दुकानदारों ने प्रशासन के सामने अपनी बात औपचारिक रूप से रख दी है। शनिवार मार्केट से जुड़े दुकानदारों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा, जिसमें अस्थायी दुकानों को हटाने की संभावित कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई गई है।
दुकानदारों का कहना है कि यह बाजार किसी भी प्रकार का स्थायी या अवैध निर्माण नहीं है। शनिवार मार्केट सिर्फ सप्ताह में एक दिन, शनिवार को सुबह 4 बजे से 11 बजे तक लगती है और तय समय के बाद सभी दुकानदार स्वयं अपनी दुकानें हटा लेते हैं। इसके बावजूद, इन्हें हटाने की चर्चा से सैकड़ों गरीब परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आदेश में दुकानों के कारण ट्रैफिक बाधित होने की बात कही गई है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बाजार सीमित समय के लिए लगता है और इससे न तो स्थायी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है और न ही आमजन को कोई बड़ी परेशानी होती है। उल्टा, इस बाजार से आसपास के लोगों को सस्ती दरों पर रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध होती हैं।
शनिवार मार्केट में दुकान लगाने वाले अधिकांश लोग गरीब, मजदूर और निम्न आय वर्ग से आते हैं। इनके लिए यही बाजार आय का एकमात्र साधन है। दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध स्थायी निर्माण और गरीबों द्वारा लगाई जाने वाली अस्थायी दुकानों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए, ताकि कानून व्यवस्था भी बनी रहे और गरीब परिवारों की रोज़ी-रोटी भी सुरक्षित रह सके।
दुकानदारों का कहना है कि यदि बाजार को पूरी तरह हटाया गया, तो कई परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए प्रशासन से इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उचित और संतुलित निर्णय लेने की अपील की गई है।
फिलहाल, ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि इस पूरे मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और क्या शनिवार मार्केट से जुड़े गरीब दुकानदारों को राहत मिल पाएगी या नहीं।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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