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छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के सरगांव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मदकू में जमीन से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक किसान की 1.88 एकड़ कृषि भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री कराए जाने का मामला उजागर हुआ है। हैरानी की बात यह है कि किसान को अपनी ही जमीन के कथित सौदे की जानकारी तब मिली जब नामांतरण का इश्तहार जारी हुआ।
मामले का खुलासा सरगांव तहसीलदार अतुल वैष्णव की सतर्कता के कारण हुआ, जिसके बाद जांच कर नामांतरण की पूरी प्रक्रिया को खारिज कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार दसवनकांपा निवासी 41 वर्षीय किसान अरुण कुमार चेलकर वर्षों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे हैं। अचानक उन्हें तब बड़ा झटका लगा जब पता चला कि उनकी जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
यह मामला ग्राम मदकू, प.ह.नं. 39 की जमीन से जुड़ा है, जिसमें—
खसरा नंबर: 345/1, 345/4 और 354
कुल रकबा: 1.88 एकड़
नामांतरण प्रकरण क्रमांक: RD202526630241100010
बताया जा रहा है कि 14 नवंबर 2025 को कथित रूप से इस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। पीड़ित किसान का कहना है कि उन्होंने कभी भी अपनी जमीन बेचने की सहमति नहीं दी।
फर्जी पहचान बनाकर कराई गई रजिस्ट्री!
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए फर्जी आधार कार्ड तैयार किया गया और किसी अन्य व्यक्ति को “अरुण कुमार” बनाकर रजिस्ट्री कार्यालय में पेश किया गया। उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।
इस मामले में बिलासपुर के तीन व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं—
कृष्ण नाथानी (वेयर हाउस रोड)
रवि मोटवानी (जरहानाठा)
सचिन पारवानी (सिंधी कॉलोनी, बलराम टॉकीज रोड)
बताया जा रहा है कि रजिस्ट्री में निलेश स्टेली और संतोष कुमार भगत (सागर, मध्यप्रदेश) को गवाह बनाया गया था।
तहसीलदार की सतर्कता से बची जमीन
सरगांव तहसीलदार अतुल वैष्णव ने जब 7 जनवरी 2026 को नामांतरण का इश्तहार जारी कराया, तब इस मामले की जानकारी किसान को मिली।
इश्तहार देखने के बाद किसान ने न्यायालय में उपस्थित होकर लिखित आपत्ति दर्ज कराई और बताया कि उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री नहीं की है। इसके बाद तहसीलदार द्वारा पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई गई।
जांच में संदेह पुख्ता होने पर नामांतरण प्रकरण को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
क्या कहते हैं तहसीलदार
तहसीलदार अतुल वैष्णव ने बताया—
“मेरे समक्ष नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। विधि अनुसार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इश्तहार जारी कराया गया और किसान को नोटिस भेजा गया। इश्तहार के बाद आपत्ति प्राप्त होने पर जांच कराई गई। जांच के बाद नामांतरण प्रकरण को खारिज कर दिया गया है और शिकायतकर्ता को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी गई है। जांच प्रतिवेदन भी थाना सरगांव को भेज दिया गया है।”
किसान ने जताया आभार
पीड़ित किसान अरुण कुमार चेलकर का कहना है—
“तहसीलदार सरगांव अतुल वैष्णव जी ने मुझे जानकारी दी कि मेरी जमीन के नामांतरण का आवेदन आया है। इश्तहार के बाद मैंने आपत्ति दर्ज कराई। जांच के बाद नामांतरण केस खारिज कर दिया गया। अगर तहसीलदार मुझे सूचना नहीं देते तो मेरी जमीन का फर्जीवाड़ा पता ही नहीं चलता। आज मेरी जमीन सुरक्षित है, इसके लिए मैं उनका आभारी हूं।”
आरोपित ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
मामले में नाम सामने आने के बाद कृष्ण नाथानी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है—
“मेरे ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। हमने पहले ही इस मामले में शिकायत कर रखी है।”
गांव में आक्रोश और चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद ग्राम मदकू और आसपास के क्षेत्रों में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी किसान की जमीन इस तरह कागजों में बेची जा सकती है, तो आम नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अब पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह देखना बाकी है कि जांच में क्या खुलासा होता है और क्या पीड़ित किसान को न्याय मिल पाता है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद
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