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नई दिल्ली, 08 मार्च 2026। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक उपलब्धि एक बार फिर चर्चा में है। 2 नवंबर 2025 को भारतीय महिला टीम ने पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया था। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
कप्तान हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने न केवल देश का बल्कि पूरे एशिया का नाम रोशन किया। भारत महिला वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली एशियाई टीम बनी। इस ऐतिहासिक जीत में पूरी टीम का योगदान रहा, लेकिन आठ खिलाड़ियों ने खास भूमिका निभाई, जिनकी बदौलत भारत ने यह गौरव हासिल किया।
हरमनप्रीत कौर
टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम ने शुरुआत में दो जीत दर्ज की, लेकिन इसके बाद तीन हार से दबाव बढ़ गया था। ऐसे समय में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम का मनोबल बनाए रखा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 9 मैचों में 260 रन बनाए। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 89 रनों की पारी ने टीम को बड़े लक्ष्य का पीछा करने का आत्मविश्वास दिया। उनकी कप्तानी और नेतृत्व ने टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
स्मृति मंधाना
स्मृति मंधाना पूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे सफल बल्लेबाज रहीं। उन्होंने 9 मैचों में 54.25 की औसत से 434 रन बनाए और टीम की जीत की मजबूत नींव रखी। उनकी शानदार बल्लेबाजी और लगातार साझेदारियों ने भारतीय टीम को कई मैचों में मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
प्रतिका रावल
टूर्नामेंट में स्मृति मंधाना की शुरुआती जोड़ीदार प्रतिका रावल ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 7 मैचों में 308 रन बनाए। न्यूजीलैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में उनकी 122 रनों की शतकीय पारी ने भारत को सेमीफाइनल की राह दिखाई। हालांकि चोट के कारण वे नॉकआउट मुकाबलों में नहीं खेल सकीं।
शेफाली वर्मा
प्रतिका के चोटिल होने के बाद शेफाली वर्मा ने टीम में वापसी की और फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 78 गेंदों में 87 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को मजबूत शुरुआत दी। इसके साथ ही गेंदबाजी में भी दो विकेट लेकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी को झटका दिया और प्लेयर ऑफ द मैच बनीं।
जेमिमा रोड्रिग्स
मिडिल ऑर्डर में जेमिमा रोड्रिग्स ने टीम को कई अहम मौकों पर संभाला। उन्होंने 8 मैचों में 292 रन बनाए। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 127 रनों की नाबाद पारी खेलकर उन्होंने ऐतिहासिक जीत की नींव रखी।
ऋचा घोष
विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने फिनिशर की भूमिका शानदार ढंग से निभाई। उन्होंने 8 मैचों में 235 रन बनाए और उनकी स्ट्राइक रेट 133.52 रही, जो पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा थी। उनकी तेज बल्लेबाजी ने टीम को कई मैचों में मजबूती दी।
दीप्ति शर्मा
ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी स्टार रहीं। उन्होंने 9 मैचों में 215 रन बनाए और 22 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता। फाइनल में उन्होंने 58 रन बनाने के साथ 5 विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका की टीम को 246 रनों पर समेट दिया।
श्री चरणी
गेंदबाजी विभाग में श्री चरणी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 9 मैचों में 14 विकेट लेकर मिडिल ओवर में विपक्षी टीमों पर दबाव बनाए रखा।
इन आठ खिलाड़ियों—हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, प्रतिका रावल, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष, दीप्ति शर्मा और श्री चरणी—की शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने महिला वनडे वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा। सेमीफाइनल में सात बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराने से लेकर फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराने तक, टीम का हर पल भारतीय महिला क्रिकेट के नए स्वर्णिम युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद

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