Social Activity BSP
बिलासपुर (Social Activity BSP) | बिलासपुर के शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और कोटा विकासखंड में सामने आए करीब 30 लाख रुपये के भृत्य घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की शिकायत के बाद कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा को स्मरण-पत्र जारी कर 72 घंटे के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने कलेक्टर और जिला स्तरीय समिति को दरकिनार करते हुए शिक्षकों की पदस्थापना मनमाने तरीके से की। युक्तियुक्तकरण संशोधन के नाम पर नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर सेटिंग के जरिए पसंदीदा स्थानों पर पोस्टिंग दी गई।
जानकारी के अनुसार, करीब 200 मामलों में बिना सक्षम अनुमति के संशोधन किए गए। कई फाइलों में आवश्यक दस्तावेज, नोटशीट और अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं पाए गए। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में शिक्षकों को मौखिक निर्देश देकर पदभार ग्रहण कराया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर चहेते लोगों को लाभ पहुंचाया गया। वहीं, रायपुर स्थित डीपीआई में पदस्थ उपसंचालक अशोक नारायण बंजारा के कथित संरक्षण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
कलेक्टर कार्यालय ने टीएल आदेश के तहत संयुक्त संचालक को निर्देशित किया है कि तीन दिनों के भीतर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किया जाए कि बिना अनुमति संशोधन आदेश कैसे जारी हुए और क्या इनमें आर्थिक लेन-देन शामिल था।
इसी के साथ कोटा विकासखंड में सामने आए भृत्य घोटाले की भी जांच तेज हो गई है, जिसमें एक कर्मचारी के खाते में वर्दी धुलाई सहित अन्य मदों के नाम पर करीब 29.64 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हर महीने 4 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान होना संदिग्ध माना जा रहा है।
हालांकि इस मामले में संबंधित क्लर्क और भृत्य को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर अब तक कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल उठ रहे हैं। जिला कोषालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
कलेक्टर द्वारा जारी स्मरण-पत्र ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब जांच में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर कार्रवाई संभव है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद




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