Social Activity BSP
नई दिल्ली (Social Activity BSP)। भारतीय कृषि निर्यात को बड़ा झटका लगा है। एक ओर चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की करीब 70 खेपें लौटा दी हैं, वहीं जापान ने भारतीय आमों के आयात पर तत्काल रोक लगा दी है। इस घटनाक्रम से किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
जापान ने अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे भारतीय आमों के आयात को निलंबित करते हुए भारत के वेपर हीट ट्रीटमेंट (WHT) सेंटरों में कथित अनियमितताओं को वजह बताया है। जापान का कहना है कि ये सेंटर निर्यात से पहले आमों को फल मक्खियों जैसे कीटों से मुक्त करने के लिए जरूरी हैं और वह कृषि सुरक्षा को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान ने निर्देश जारी किया है कि 25 मार्च 2026 के बाद जारी भारतीय निरीक्षण प्रमाणपत्रों वाले आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी। बताया जा रहा है कि करीब 20 वर्षों बाद जापान ने भारतीय आमों पर इतना बड़ा प्रतिबंध लगाया है।
वहीं, चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की खेपों में जीएमओ (Genetically Modified Organism) होने का दावा करते हुए लगभग 70 शिपमेंट वापस लौटा दिए। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है that देश में कपास को छोड़कर किसी अन्य जीएम फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है और भारत में जीएम चावल उगाया ही नहीं जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कई देश तकनीकी मानकों और आयात नियमों का इस्तेमाल व्यापारिक दबाव के रूप में कर रहे हैं। इस बीच, जापान के प्रतिबंध और चीन की सख्ती से किसानों और निर्यातकों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद




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