महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों पर तीखा हमला: “जनता त्रस्त, सरकार दे रही अजीब सलाह” — प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपों की बौछार

Social Activity BSP

नई दिल्ली/रायपुर/ बिलासपुर (Social Activity BSP)। देश में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर जमकर निशाना साधा गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आम जनता डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस, खाद्य सामग्री और टैक्स के बढ़ते बोझ से परेशान है, लेकिन राहत देने के बजाय सरकार “उपभोग कम करने” जैसी सलाह देकर लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न मुद्दों पर आंकड़ों और दावों के आधार पर सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई।

उर्वरक संकट पर सरकार घिरी, किसानों की परेशानी का दावा

पत्रकारवार्ता में किसानों को उर्वरक (फर्टिलाइजर) के इस्तेमाल को लेकर दी गई कथित सलाह पर सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि पिछले कई वर्षों से देश में उर्वरकों की भारी कमी बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए दावा किया गया कि राज्य में करीब 15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता है, लेकिन सहकारी समितियों तक करीब 30 प्रतिशत आपूर्ति ही पहुंच पा रही है। वक्ताओं ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के वादों के बावजूद आज किसान महंगे उर्वरक खरीदने को मजबूर हैं और आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।



‘वर्क फ्रॉम होम’ सलाह पर उठे सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से कामकाजी लोगों को “वर्क फ्रॉम होम” करने की सलाह पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि दिहाड़ी मजदूर, फेरीवाले, छोटे व्यापारी और फील्ड में काम करने वाले लोग घर बैठकर काम नहीं कर सकते, ऐसे में इस तरह की सलाह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।

2013 बनाम 2026: बढ़ती कीमतों को लेकर जारी किए आंकड़े

महंगाई के मुद्दे पर वक्ताओं ने वर्ष 2013 और 2026 के बीच जरूरी वस्तुओं के दामों की तुलना पेश की। दावा किया गया कि—

  • 10 किलो आटा ₹210 से बढ़कर ₹530 तक पहुंच गया।
  • रसोई गैस सिलेंडर ₹410 से बढ़कर ₹1000 तक पहुंच गया।
  • सरसों तेल ₹52 प्रति लीटर से बढ़कर ₹260 प्रति लीटर हो गया।
  • जीरा ₹220 से बढ़कर ₹1450 प्रति किलो तक पहुंच गया।

इसके अलावा, साबुन और आवश्यक दवाइयों की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी का दावा किया गया, जिससे आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित होने की बात कही गई।

ईंधन कीमतों और टैक्स नीति पर सवाल

पत्रकारवार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। वक्ताओं ने दावा किया कि पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी टैक्स के कारण आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

सोने की कीमत और कर्ज में फंसते परिवारों का दावा

वक्ताओं ने कहा कि सोने की कीमतों में वर्षों के दौरान कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे आम आदमी की क्रय क्षमता प्रभावित हुई है। साथ ही एक सर्वे का हवाला देते हुए दावा किया गया कि महंगाई, जीएसटी और टोल टैक्स के बढ़ते बोझ के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।

सरकार पर विफलता का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक मोर्चे और संकट प्रबंधन में अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। साथ ही मांग की गई कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट को लेकर व्यापक चर्चा कर राहत उपायों पर काम किया जाए।

नोट: यह प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यक्त किए गए दावे और आरोप हैं। संबंधित मुद्दों पर सरकार या आधिकारिक पक्ष का जवाब अलग हो सकता है।


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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