टीएमसी में बढ़ा अंदरूनी बवाल, ममता और अभिषेक बनर्जी को नेतृत्व से हटाने की उठी मांग

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२९ मई २०२६ (Social Activity BSP)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जहां लगातार इस्तीफे दे रहे हैं और नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से हटाने की मांग भी उठने लगी है।

कोलकाता नगर निगम के तृणमूल पार्षद और मेयर पार्षद तारक सिंह ने पार्टी नेतृत्व में बदलाव की खुलकर वकालत करते हुए कहा कि पार्टी किसी की पुश्तैनी संपत्ति नहीं है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा नेतृत्व को बदलने की जरूरत है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा ममता बनर्जी की ओर है, तो उन्होंने इसका समर्थन करते हुए नेतृत्व परिवर्तन की मांग दोहराई।

अभिषेक बनर्जी को लेकर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की और बिना नाम लिए कहा कि यदि उनका बेटा अपराधी होता तो वह शासन नहीं करते। इस बयान ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है।

इस बीच, पार्टी के अन्य नेताओं ने भी चुनावी हार और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। तृणमूल नेता बिस्वजीत देब ने आरोप लगाया कि पार्टी में भ्रष्टाचार शीर्ष नेतृत्व की जानकारी के बिना संभव नहीं है। वहीं, कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस्तीफे दिए जाने से संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

हाल ही में तृणमूल पार्षद सुशांत घोष ने बरो चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया, जबकि अरूप चक्रवर्ती ने म्युनिसिपल अकाउंट्स कमेटी की सदस्यता छोड़ दी। पूर्व सांसद शांतनु सेन ने भी पार्टी में व्याप्त भ्रष्टाचार और विवादों को चुनावी हार की बड़ी वजह बताया है।

पार्टी के वरिष्ठ सांसदों के बीच खुले विवाद और लगातार बढ़ते असंतोष ने टीएमसी के भीतर दबाव की स्थिति पैदा कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर यह असंतोष और गहरा सकता है।


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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